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अश्ववैद्यकम् (जयदत्त सूरि - विस्तृत अश्व-रोग निदान एवं शल्य-चिकित्सा महाग्रन्थ)

अश्ववैद्यकम् (जयदत्त सूरि - विस्तृत अश्व-रोग निदान एवं शल्य-चिकित्सा महाग्रन्थ)

Ashvavaidyaka of Jayadatta Suri with Commentary

जयदत्त सूरि (सम्पादक: उमेशचन्द्र गुप्त कविरत्न) द्वारा

DevanagariHindipublished522 पृष्ठ

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पृष्ठ 378

[ १२ ]
४१ अजीर्णरोगाध्याये—
पृ० श्लो० ।
” अजीर्णलक्षणम् ... .. २५६—१
” तच्छिकित्सा ... ... ... २५७—३
४२ अतीसाराध्याये—
” वाताद्यतीसारलक्षणचिकित्सितम्... २५८—१
” पित्तातिसारचिकित्सा ... ... २६०—१२
” श्लेष्मातिसारचिकित्सा ... ... २६०—१५
” आमसन्निपातद्वन्द्वजातिसारचिकित्साः २६१—१८
४३ शूलरोगाध्याये—
” पञ्चविधशूलनिदानलक्षणानि ... २६१—१
” सौभिद्यविबन्धचिकित्साः ... २६३—७
४४ उदावर्त्तरोगाध्याये—
” उदावर्त्तलक्षणचिकित्सितम् ... २६५—१
४५ प्रस्कन्नरोगाध्याये—
” प्रस्कन्नरोगलक्षणचिकित्सितम् ... २६६—१
४६ कृमिकोष्ठाध्याये—
” कृमिकोष्ठनिदानचिकित्सितम् ... २६८—१
” श्लेष्मकोष्ठनिदानचिकित्सिते ... २७०—१७
४७ मूत्रग्रहरोगध्याये—
” वातादिमूत्रग्रहलक्षणानि ... २७१—१
” वातमूत्रग्रहचिकित्सा ... २७२—५
” पित्तमूत्रग्रहचिकित्सा ... ... २७२—६
” श्लेष्ममूत्रग्रहचिकित्सा ... ... २७३—१५