अश्ववैद्यकम् (जयदत्त सूरि - विस्तृत अश्व-रोग निदान एवं शल्य-चिकित्सा महाग्रन्थ)

अश्ववैद्यकम् (जयदत्त सूरि - विस्तृत अश्व-रोग निदान एवं शल्य-चिकित्सा महाग्रन्थ)
Ashvavaidyaka of Jayadatta Suri with Commentary
जयदत्त सूरि (सम्पादक: उमेशचन्द्र गुप्त कविरत्न) द्वारा
DevanagariHindipublished522 पृष्ठ
पृष्ठ 377, कुल 522 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 377
ध्याये— wait, check spelling of पादरोगाध्याये—:
प, ा, द, र, ो, ग, ा, ध्, य, ा, य, े, — -> पादरोगाध्याये—
- ” पादरोगसंख्या ... ... २४४—१
- ” पादरोगलक्षणानि ... ... २४५—६
- ” एषां चिकित्सा ... ... २४७—२३
- ४० ज्वररोगाध्याये—
- ” वातज्वरनिदानलक्षणानि ... २५१—१
- ” वातज्वरचिकित्सा ... ... २५१—४
- ” पित्तज्वरलक्षणम् ... ... २५२—८
- ” पित्तज्वरचिकित्सा ... ... २५२—६
- ” श्लेष्मज्वरनिदानम् ... ... २५४—१८
- ” तच्चिकित्सा .. ... २५४—२०
- ” सन्निपातज्वरलक्षणचिकित्साः ... २५५—२४
- ” अभिघातज्वरलक्षणचिकित्साः ... २५५—२५
Wait, let's check पृ० श्लो० ।
Is there a space before ।? Yes: पृ० श्लो० ।.
Everything is checked and solid.[ ११ ]
३६ व्रणरोगाध्याये—