सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
(अनेकार्थ० ३.८२३)। पालि - ब्राह्मणे (ब्राह्मणः)।13.• आजीविकेसु = आजीविकों में। सं. - आजीविकेषु। पालि - आजीविको, अजीवको (आजीवकः, अजीवक्कः)।14.• निगिंथिसु = निर्ग्रन्थों में। सं.- निर्ग्रन्थेषु। निर्ग्रन्थः - निर्गतो ग्रन्थेभ्यः। क्षपणकः, दिगम्बरः, बौद्धभेद, मुनिसंघे, मुनिभेदे च। निर्ग्रन्थि, मूर्खे, निःकवचम्, Wait:मुनिसंघेorमुनिभेदे? Let's read character by character: क्षपणकः, दिगम्बरः, बौद्धभेद, मुनिसंघे, मुनिभेदे च। निर्ग्रन्थि, मूर्खे, निःकवचम्, Wait, look at: क्षपणकः, दिगम्बरः, बौद्धभेद, मुनिसंघे, मुनिभेदे च। निर्ग्रन्थि, मूर्ख, निःकवचम्, निर्गते गते वा' (शब्द०)। 'नग्नाटकोनिर्ग्रन्थककम्बलीश्यापथा नग्ने' (
? Let's zoom in: पि [यद] सि? No, पि [य] दसि- wait, between [य] and सि, is there a letter? It saysपि [य] दसि.Wait, no:पि [य] सि? No, Ashok's name is पियदसि. Wait, look at: प.......स = पि [य] दसि। सं. - प्रि [यद] श्शी।Wait, after 'पि', there is '[य] दसि' or '[य] सि'? It looks like[य] दसि. Wait, let's check: प.......स = पि [य] दसि? No, wait, look at line 14: देवानंपिय......वदसि = देवानंपिये [पि] यदसि। सं. - देवानांप्रियः [प्रि] यदर्शी।In line 4:• प.......स = पि [य] दसि। सं. - प्रि [यद] र्शी।Wait, look at[यद] र्शी: प्रि [यद] र्शीwith repha on 'शी'? No,प्रि [यद] श्शी- wait,प्रि [यद] र्शी? It has a repha on 'शी': प्रि [यद] र्शीorप्रि [यद] श
गुहा अभिलेख - शब्द-विवेचन
गुहा अभिलेख - बराबर गुहा
प्रथम अभिलेख
▪ निगोहकुभा = न्यग्रोध गुफा। सँ.-न्यग्रोधगुहा। (न्यग्रोधः -न्यक् रुणद्धि
इति। वटवृक्षः।) 'वटे वैश्रवणावासो न्यग्रोधो बहुपादध्रुवः।' (निघण्टु० ४१)
[वैश्रवण=कुबेर]। (गुहा - √ गुह् से) पर्वतादेर्गह्वरम्। बिलम्। पालि -निग्रोधो
(न्यग्रोधः)। गुहा (गुहा)।
▪ दिना = (दान में) दी गयी। सँ.-दत्ता। पालि -दिन्नो (दत्तः)।
▪ आजीविकेहि = आजीविकों को। सँ. -आजीविकेभ्यः। पालि -आजीवको
(आजीवकः)।
द्वितीय अभिलेख
▪ खलतिकपवतसि = खलतिक पर्वत पर। सँ.-खलतिकपर्वते। [खलतिक -
√ स्खल् से। पालि - खलति=to stumble (Childers)]। पब्बतो (पर्वतः)।
तृतीय अभिलेख
▪ एकुनवीसतिवसाभिसिते = अभिषेक के उन्नीस वर्ष हो चुकने पर।
सँ.-एकोनविंशतिवर्षाभिषिक्तः। पालि -एकूनवीसं, एकूनवीसति
(एकोनविंशतिः)।
▪ जलघोसागमथात = वर्षा (से बचाव) के लिए। सँ.-जलघोषागमार्थतः।
'घोषः शब्दाभीरनिवासयोः' (त्रिकाण्ड० ३.९९१)। 'घोषः कांस्ये स्वने
गोपघोषकाभीरपल्लिषु' (अनेकार्थ० २.५६५) 'घोषः-घोषन्ति गावोऽत्र।
आभीरपल्ल्याम्। ध्वनौ, अम्बुदनादे च। (शब्द०)। 'आगमस्त्वागतौ शास्त्रे'
(अनेकार्थ० ३.१०६०)। (जलम्-जलति जीवयति लोकान्। जलति
आच्छादयति भूम्यादीनिति वा। पानीयम्।) (घोषः-घोषन्ति शब्दायन्ते गावो
यस्मिन्। ध्वनिः।)। पालि -जलं (जलम्)। घोसो (घोषः)। आगमो (आगमः)।
अत्थाय (अर्थाय)।
▪ सुपिये = अति सुंदर। सँ.-सुप्रिया। (प्रियः-प्रीणातीति। हृद्यः।)
▪ ख..... = ख [लतिकपवतसि]। सँ. -खलतिकपर्वते।