सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary
देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा
पृष्ठ 79, कुल 80 में से
संदर्भ में पढ़ें? Let's zoom in: पि [यद] सि? No, पि [य] दसि- wait, between [य] and सि, is there a letter? It saysपि [य] दसि.Wait, no:पि [य] सि? No, Ashok's name is पियदसि. Wait, look at: प.......स = पि [य] दसि। सं. - प्रि [यद] श्शी।Wait, after 'पि', there is '[य] दसि' or '[य] सि'? It looks like[य] दसि. Wait, let's check: प.......स = पि [य] दसि? No, wait, look at line 14: देवानंपिय......वदसि = देवानंपिये [पि] यदसि। सं. - देवानांप्रियः [प्रि] यदर्शी।In line 4:• प.......स = पि [य] दसि। सं. - प्रि [यद] र्शी।Wait, look at[यद] र्शी: प्रि [यद] र्शीwith repha on 'शी'? No,प्रि [यद] श्शी- wait,प्रि [यद] र्शी? It has a repha on 'शी': प्रि [यद] र्शीorप्रि [यद] श