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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

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३७. निम्न मंगल की ओर जाती हुई रेखाएं—क्रोध में आत्महत्या ।
३८. मंगल पर्वत की ओर जाती हुई रेखाएं—प्रेम के कारण युवावस्था में
बदनामी ।
३६. शुक्र पर्वत की ओर अंदर की ओर जाती हुई रेखाएं—प्रेम-भंग ।
४०. जीवन रेखा को कई स्थानों पर काटती हुई रेखाएं—पारिवारिक जीवन
में पूर्ण असफलता ।
४१. जीवन रेखा को काटकर भाग्य रेखा तक जाने वाली रेखा—व्यापार में
पूर्ण असफलता ।
४२. जीवन रेखा को काटकर मस्तिष्क रेखा की ओर जाती हुई रेखा—
पागलपन ।
४३. जीवन रेखा को काटकर हृदय रेखा की ओर जाती हुई रेखा—हृदयरोग
से पीड़ित ।
४४. जीवन रेखा तथा हृदय रेखा को काटती हुई रेखा—प्रेम कार्यों में
असफलता ।
४५. हृदय रेखा की ओर जाने वाली रेखा के अन्त में द्वीप—दुखपूर्ण वैवाहिक
जीवन ।
४६. जीवन रेखा और सूर्य रेखा को काटती हुई रेखा—सामाजिक पतन ।
४७. शुक्र पर्वत तथा जीवन रेखा पर नक्षत्र का चिह्न—घरेलू झगड़े ।
४८. सूर्य रेखा तथा जीवन रेखा पर नक्षत्र—दुखमय घरेलू जीवन ।
४६. मस्तिष्क हृदय रेखा तथा जीवन रेखा पर चिह्न—रोगपूर्ण जीवन ।
५०. भाग्य रेखा तथा जीवन रेखा पर त्रिकोण—आर्थिक हानि ।
५१. सूर्य रेखा तथा जीवन रेखा पर त्रिकोण—अपराधपूर्ण जीवन ।