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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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पृष्ठ 58

आवाम के हेतु नई बस्ती प्रदान की थी। इन सब सुकृतो का
उल्लेख प्रस्तुत तीर्थकल्प के "कन्यानयनीय महावीर कल्प और
कल्प परिशेष मे विस्तार से आया है जो समकालीन और विश्वस-
नीय है। सूरिजी की जीवनी और उनकी साहित्य सेवा के सम्बन्ध
मे विस्तृत जानने के लिए हमारे प्रकाशित व महो० विनयसागर
जी लिखित "शासन प्रभावक जिनप्रभसूरि" ग्रंथ द्रष्टव्य है।
आचार्य श्री ने अपने विचरण काल मे अनेक तीर्थो की
यात्राएँ की थी उनमे से शत्रुञ्जय, गिरनार, स्तभ तीर्थ आदि कई
तीर्थों के तो प्राचीन कल्प उपलब्ध थे, उनके आधार से तथा
अपने सुने हुए देखे हुए वृत्तान्तो के आधार से बहुत से तीर्थकल्पो
की रचनाएँ की थी इनमे से सवतोल्लेख वाले व आनुमानिक
निर्णीत संवतो वाले कल्पो की नामावली यहाँ दी जा रही है—
१ वैभारगिरि कल्प सं० १३६४।
२ चम्पापुरी कल्प सं० १३६० की घटना का उल्लेख।
३ सत्यपुर तीर्थ कल्प सं० १३६७ की घटना का उल्लेख।
४ अर्बुदगिरि कल्प सं० १३७८ (शक सं० १२४३) मे लल्ल
और पीठड के उद्धारका उल्लेख।
५ शत्रुञ्जय तीर्थ कल्प सं० १३८५ ज्येष्ठ सुदि ७।
६ ढिपुरी स्तव सं० १३८६ (शक सं० १२५१)।
७ अपापा वृहत्कल्प सं० १३८७ भाद्रपद गु० १२ पुष्यार्क देव-
गिरि नगरे।
८ कन्यानयनीय महावीर प्रतिमा कल्प सं० १३८५ का
उल्लेख।
९ हस्तिनापुर तीर्थ स्तव सं० १३८८ (शक सं० १२५३) वै०
सु० ६।
१० महावीर गणधर कल्प सं० १३८९ ज्ये० सु० ५।