विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट—२
एक तीर्थयात्रा विवरण
श्री सारदाय नमो नम । श्री ऋषभदेव नम । नीमीवणमी
वाहवल जी 'मूल कोटनी संख्या । देहरा देहरी आलिया ४५८ मोटी
नानी प्रतिमा २३४७ संख्या जिन गणधर मुनि पगला संख्या ८७५ ।
• मोटा नाना देहरा देहरी आलिया २३४ सरवाले मली ने
प्रतिमांनी संख्या ७९७ पगलां की संख्या ६५ ए संख्या हाथी पोल-
वाहरनी छै ।
• अदवद बाबा को मदर १ प्रतिमा १ पासे देहरी ३ प्रतिमा
३ एव देवल ४ प्रतिमा ४ ।
• पेमावसी माँ देवल प्रतिमा पगला ॥ देहरा देहरी ४०
प्रतिमा ३८२ पगला ८६ त्रिकाल नमस्कार होज्यो ।
॰ अथ छीपावसोनि संख्या लखीये छें ॥ देहरा देहरी १३
प्रतिमा ५२ पगला २ एहो नै नमस्कार होज्यो ।
• अथ खडतरवसोनि संख्या लख्यते । देहरा देहरी आलिया
१०५ प्रतिमा १५०५ पगला १०८४ ए तिहु टुकने तिहु काल
नमस्कार होज्यो ।
[ प्रथम आदीश्वर जिनालय मे मध्य बैठो पद्मासनस्थ प्रतिमा
के दोनो ओर काउसग्गिए खड़े हैं । वृषभ लाछन है । नीचे ।
रतनपोल-लिखा है । दूसरी पोलमे दोनो ओर दो हाथी व तीसरी
मे २ वाघ हैं । उपरोक्त वर्णन बीच मे लिखा हुआ है । ]
श्री तीर्थ जात्रा करी तेहनी वगत लखी छै । प्रथम श्री सिद्धा-