विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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चल जी नी भमती, ते मद्दे १०८ फरती डेरी छे । अने भमती माहि
डेराछे प्रथम सेहश्रकोट जी तथा समोसरण जी तथा अष्टापद जी
तथा मेरुपर्वत जी तथा समत सीखर जी तथा नेमनाथ जी डेरो
छे, तथा श्री महावीर जी को तथा चोमुख जी की डेरी चोवीस
छे, तथा एक रायण नो झाड छे, ते हेठले पगलां श्री ऋषभदेव जी
ना छे । पगला नि डेरी २७ वीश छे तथा गणधर ना पगला छे ।
तथा । सहश्र कुट ना पगला १००० १० पगला छे । तेहने पाशे श्री
शान्तिजी को देवल छे तथा दरवाजो पासे साहम सामाबे डेरा
श्री ऋषभदेव जी ना छे ।
एक चोमुख जी को देवरो छे एक जीवत स्वामी को । एक
श्री मदोर स्वामी जी को छे । तथा एक श्री गोडी पार्श्वनाथ जी
का एक श्री अमीझरा पार्श्वनाथ जी को छे तथा दरवाजा पर
श्री पुडरीक गणधर जी को देवल छे । पाशें एक चौवीसी को
देवरो छे, एक पचतीर्थी धात की छं ।
अथ हवे दरवाजा बाहरे वामादेवी छे तथा दरवाजा वाहरे
सभननाथ जी को देवरो छे अने अजीतनाथ जी अनें श्री शांतिनाथ
जी को अने सहस्रफणा पार्श्वनाथ जी छे । तिहांथी छेटे आवतां
जमणी को रेगामलीया पार्श्वनाथ जी अने श्री चिंतामण पार्श्वनाथ
जी ओर डेरा १०१५१ छे हवे श्री नेमनाथ जी की चोरी छेते मद्दे
भमती छे तेहने बाहरें मोक्ष वारी छे तेहनें वाहरे केसरी चकेसरी
छे तेहने साहमू श्री शांतिनाथ जी को देवरो छे ते साहमा कवड
यक्ष बैठा छे तेहनें माथे श्री चउमुखी जी नो देरो छे अनें दरवाजा
त्रीजा वार हडूमान जी छे तथा खेतपाल छे तथा गणेश जी छे
तथा वामादेवी के साहमी शासन देवी छे तिहां जक्ष नी चोकी छे ।
[ श्री देवकी जी ना ६ पुत्र छे सी पाछे ] ॥ तेहने साहमी छत्री छे
मुनीश्वर की तिहा थी गउ दो जइये एतले गुपा गुप्त छे तीहा ते