विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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श्री कन्यायननीय महावीर प्रतिमा का यह कल्प संपूर्ण हुआ ।
इस की ग्रन्थ संख्या ७७ और १५ अक्षर हैं ।
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२३. प्रतिष्ठान पत्तन-कल्प
महाराष्ट्र रूपी लक्ष्मी के रत्नापीड, रम्य हवेलियो और नेत्रो
को गीतल करने वाले चैत्यो से युक्त गोदावरी से पवित्रित श्री-
प्रतिष्ठान नामक पत्तन जयवत रहे ।
यहाँ अड़सठ लौकिक तीर्थ और वावन वीर हैं। वीर
क्षेत्र होने के कारण यहाँ सूर्य के समान प्रौढप्रणाली राजामो का
भी प्रवेश नही होता ।
रात्रि बीतने पर उषाकाल मे यहाँ से साठ योजन चल कर
अश्व को प्रतिवोध करने के लिए श्री मुनिसुव्रत जिनेश्वर भरोच
पधारे थे ।
भगवान महावीर के निर्वाण से ९९३ वर्ष बीतने पर यहाँ
श्री कालिकाचार्य ने सावत्सरिक पर्व भाद्रपद शुक्ल ४ को किया ।
यहाँ के आयतनो की पंक्ति को देखकर विचक्षण पुरुष देव-
विमान मे अग्रणी श्री विलोकविमान को देखने का कौतुहल त्याग
देते हैं ।
यहाँ शातवाहन आदि विचित्र चरित्र वाले नरेश्वर हुए हैं एवं
यहाँ के अनेको सदन बहुत प्रकार के देवताओ से अधिष्ठित हैं।