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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 89

४४ भूमिका
दाम्पत्य प्रेम का अभाव
दाम्पत्य प्रेम का भी यही हाल है कि पुरुष ने स्त्री को केवल
विषय भोग के ही लिये समझ रक्खा है इसलिये जैसा चाहिये स्त्री
पुरुष को वैसे दाम्पत्य प्रेम का आनन्द नहीं मिलता । इसी कारण
सन्तान भी रोगी निर्बल दुर्बल और कम आयुवाली होती है ।
दाम्पत्य प्रेम के विषय मे भी यहां वेद और शास्त्रो का मत
बतलाया जाता है । वेद मे परमात्मा आज्ञा देता हैः—
देवा अग्रे न्यपद्यन्त पत्नीः,
समस्पृशन्त तन्वस्तनूभिः ॥
सूर्येव नारि विश्वरूपा महित्वा,
प्रजावती पत्या संभवेह ॥
हे सौभाग्यवती स्त्री ! तू इस गृहाश्रम मे, प्रथम जैसे
विद्वान् लोग उत्तम स्त्रियों को प्राप्त होते है और शरीरों से शरीरो
को स्पर्श करते है वैसे विविध सुन्दर रूप को धारण करने वाली
सत्कार को प्राप्त होकर सूर्य की कान्ति के समान अपने स्वामी
के साथ मिलके उत्तम सन्तान उत्पन्न करने वाली हो ।
संपितरावृत्विये सृजेथां,
माता पिता च रेतसो भवाथः ।