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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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दाम्पत्य प्रेम का अभाव ४५
मर्य इव योषमधिरोहयैनां,
प्रजां कृण्वाथामिह पुष्यतं रयिम् ॥
अर्थात्—हे स्त्री पुरुषो ! तुम बालकों के उत्पन्न करने वाले ऋतु
समय में सन्तानो को अच्छे प्रकार उत्पन्न करो। माता और पिता
दोनो वीर्य को मिलाकर गर्भाधान करने वाले हों। हे पुरुष !
इस अपनी स्त्री को प्राप्त होने वाले पति के समान सन्तानो मे
बढ़ो और दोनों इस गृहाश्रम मे प्रेम पूर्वक मिलकर सन्तान को
उत्पन्न करो और पालन पोषण करो तथा पुरुषार्थ से धन को
प्राप्त करो।
तां पूषञ्छिवतमामेरयस्व,
यस्यां बीजं मनुष्या वपन्ति ।
या न ऊरू उशती विश्रयाति,
यस्यामुशन्तः प्रहरेम शेपः ॥
अर्थात्—हे वृद्धिकारक पुरुष ! जिसमे मनुष्य लोग वीर्य को
बोते हैं। जो हमारी कामना करती हुई ऊरु को विशेष सुन्दरता से
आश्रित करती है। जिसमे सन्तानो की कामना करते हुए हम
उपस्थेन्द्रिय का प्रहरण करते हैं उस अतिशय कल्याण करने
हारी स्त्री को सन्तान उत्पत्ति के लिये प्रेम से प्रेरणा कर।
हे स्त्री और पुरुष ! जैसे सूर्य सुन्दर प्रकाशयुक्त प्रभात वेला
मे प्राप्त होता है वैसे ही सुख से घरके मध्य मे सन्तान उत्पत्ति