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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 88

वेद शास्त्रों की आज्ञा ४३
अब भी एक सौ वर्ष से अधिक की आयुवाले देखने मे आते हैं।
एक सौ वर्ष के लगभग आयु वाले तो अनेको देखे जाते हैं और
उनकी सन्तान भी हृष्ट पुष्ट और आरोग्य देखी जाती है ।
वेद आयुर्वेद और धर्म्मशास्त्र सभी से यह बात साबित
होती है कि विवाह का लक्ष्य उत्तम सन्तान उत्पन्न कर दीर्घ-
जीवी हो मनुष्य जीवन का सच्चा आनन्द और सुख भोगना
है परन्तु अज्ञानता और भूल से विवाह होते ही पुरुष विषय-
वासना की तृप्ति की इच्छा से, आनन्द की इच्छा से सन्तान की
इच्छा से नहीं, स्त्री संभोग मे लिप्त होकर शक्तिहीन निर्बल दुर्बल
और अल्पायु होते हैं। इससे यह भी मालूम होता है कि पुरुषों ने
विवाह का लक्ष्य केवल विषय भोग ही समझ रक्खा है दाम्पत्य
प्रेम या सन्तान उत्पत्ति नही ।
भारत वर्ष मे इस समय अधिकांश मनुष्य प्रायः ऐसे हैं जो
स्त्री संभोग केवल विषयानन्द के लिये ही करते है। एक सन्तान
उत्पन्न होने के वाद तो विरले ही पुरुष दूसरी सन्तान की इच्छा से
स्त्री संभोग करते है । उनका संभोग केवल क्षणिक आनन्द का
कारण होता है। कितने ही पुरुष ऐसे देखे जाते हैं जिन को
अपनी स्त्री में गर्भ रह जाने से आन्तरिक कष्ट होता है क्योंकि
गर्भावस्था में उन्हे मजबूरन यदि पूरे नौमास के लिये नहीं तो
एकाध मास के लिये तो संभोग छोडना ही पड़ता है। परन्तु शास्त्रा-
नुकूल विवाह का यह सच्चा लक्ष्य नही है और न इससे मनुष्य
जीवन की सफलता ही है।