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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 636

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४५३


भी है परन्तु उन मूर्खा खियो को तो उसी मे आनन्द आता है,
मानो उन्ही सब की सोहागरात हो रही है। बड़ी खुशी से गाना
बजाना खाना पीना होता है। उस गाने बजाने मे लड़के की
चिल्लाहट सुन कर भी कोई परवाह नही की जाती।
बहू तो पूरी अवस्था प्राप्त है और पतिजी अनजान है। संभोग
का नाम भी नही जानते पत्नी तो अपनी इच्छा पूरी करना चाहती
है, क्योंकि वह तो अनेक वार मासिकधर्म से होचुकी है; इसलिये
उसे सभोग की प्रबल इच्छा है। गर्भाधान के लिये उसकी
इन्द्रियां ऋतु होने पर सभोग के लिये उत्साहित हो चुकी हैं इस
लिये वह इसी दिन का रास्ता देख रही थी। वह तो अपनी इच्छा
पूरी करना चाहती है। परन्तु जब वह पति को इस काम में अन-
जान पाती है तो उस की सब इच्छाएं हृदय मे भस्म हो जाती है।
उसी दिन के लिये नही सदैव के लिये वह निराश हो जाती है।
वह किसी प्रकार उस छोटे से पति पर भी सन्तोष करके-यदि पति
का प्यार करना चाहती है तो पति उससे डरता है, दूर भागता है।
यदि पति इस छोटी अवस्था में कुसंगति मे पड़कर कुछ इस
विषय मे शिक्षा पा चुके होते हैं और उन्होने प्रसंग किया भी, तो
उससे उस युवती पत्नी की काम वासना की तृप्ति नही होती
वह यदि प्रतिदिन भी इस प्रकार प्रसग करता है तो भी पत्नी की
इच्छा पूत्ति न होकर और भी उत्तेजना बढकर व्याकुलता होती
है और पति जी दिन दिन निर्बल होते जाते हैं यहाँ तक कि
वीर्य-क्षीण होने से कुछ दिन बाद किसी काम के नही रहते।