विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४२६
हजारों स्त्रियो की जवानी यह बात सुनी गई कि पति जी
तो दो दो तीन तीन बार संभोग करते हैं परन्तु हमारी इच्छा
एक बार भी नही होती क्योंकि पति जी का हमारे पास आते ही
बातचीत करते ही करते वीर्य बहने लगता है, दो तीन घंटे मे
फिर प्रसग के लिये तैयार होते हैं फिर ऐसा ही होजाता है। हमारी
कभी इच्छा ही नहीं होती, हम महीनों तक पति के सग से कुछ
लाभ नहीं उठाती गर्भ कैसे रहे। इससे मालूम होता है जो पुरुष
अनियम प्रसंग करते हैं उनको बड़ी हानि पहुंचती है। स्त्रियो को
प्रसंग से तो उतनी नही पहुँचती परन्तु प्रसंग ठीक न होने
से उन्हें और भी अनेक रोग उत्पन्न होजाते हैं जिनका वर्णन
आगे कहूंगी। यहां इतना वर्णन करने से यह पता चल जायगा
कि अनेक कारणों से योनि मे भिन्न २ प्रकार की खराबियां
होती हैं। यहां केवल वीर्य सम्बन्धी पुरुष रोगों का-जो अनियम
प्रसंग से उत्पन्न होते हैं उनका वर्णन करती हूँ ।
तथा बीजमकालाम्बुकृमिकीटाग्नि दूषितम् ।
न विरोहति सन्तुष्टं तथा शुक्रं शरीरिणाम् ॥
अर्थात्—जैसे कुसमय वर्षा होने से कीड़े मकोड़े वा अग्नि
दग्ध के कारण बिगड़ा हुआ बीज अकुरित नही होता अर्थात्
सड़ा गला घुना बीज बोने से पौधा नहीं जमता इसी प्रकार
मनुष्य का बिगड़ा हुआ वीर्य भी सन्तान उत्पन्न करने के योग्य
नही रहता ।