विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१० आनन्द मन्दिर
वीर्य के दूषित होने का कारण
आयुर्वेद बतलाता है:-
अतिव्यवायाद्व्यायामादसात्म्यानां च सेवनात् ।
अकाले चाप्ययोनौ वा मैथुनं न च गच्छतः ॥
अर्थात्-अति शारीरिक परिश्रम और प्रकृति के विरुद्ध
पदार्थों का सेवन करना, कुसमय मैथुन करना व अयोन मे
मैथुन करना तथा अगम्या योनि से मैथुन करना । रुखे, कसैले,
तीक्ष्ण, खट्टे, चरपरे, राई, मिर्चा, सिरका आदि पदार्थों का अत्यन्त
सेवन करना अत्यन्त गरम नमकीन पदार्थों का सेवन अत्यन्त मीठे,
भारी, चिकने अन्न का सेवन करना। हानिकारी पदार्थों का सेवन
करना। वृद्धावस्था, चिन्ता शोक और प्रकाश स्थान में स्त्री गमन
करना और शिश्नेन्द्रिय तथा उसके समीप वाली नसों पर शस्त्र
कर्म, अग्नि दाह और क्षार कर्म का अनुचित विधि से होना,
भय क्रोध व्यभिचार, मल मूत्र वेगो का रोकना, धातु की
क्षीणता तथा सप्त धातुओं का दूषित होना इन कारणों से सम्पूर्ण
दोष अलग अलग अथवा सब एक साथ मिलकर वीर्य वाली
नलियों मे पहुंच कर वीर्य को शीघ्र ही दूषित कर देते हैं ।
जिसके कारण पुरुषो को अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो
जाते हैं और वीर्य क्षीणता तथा नपुसकता उत्पन्न होती है
और अनेक भयंकर रोग उत्पन्न होकर जीवन लीला दुःखमय