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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 607

४२८ आनन्द मन्दिर
वे रोया करते हैं और बिना स्तम्भन के जो कुछ आनन्द प्राप्त
करते थे वह भी हाथ से जाता रहता है फिर उनकी उसी कुत्ते
की सी दशा हो जाती है कि:—
आधी छोड़ एक को धावै, ऐसा डूबै थाह न पावै ।
इसलिये ऐसी पुस्तकों के प्रयोगों को जो बिना वैद्यक के
ज्ञान के बनाई गई हों काम में नहीं लाना चाहिये। मेरे पास
प्रतिदिन बीसों ऐसी स्त्री पुरुषों के पत्र आया करते हैं जो ऐसी
पुस्तकों के प्रयोगों से हानि उठा चुके हैं और उठा रहे हैं।
अनियम संभोग और पुरुष रोगों
की उत्पत्ति
अनियम और अधिक स्त्री प्रसंग से स्त्रियों को हानि पहुँचती
है। यही नहीं पुरुषों को अनियम स्त्री प्रसंग से बहुत अधिक हानि
पहुँचती है क्योंकि अनियम प्रसंग में स्त्री हिस्सा नहीं लिया
करती। इसका कारण यह है कि पुरुषों में अधिक संख्या ऐसे
पुरुषों की है जो शीघ्रपात व शिथिलता के कारण शीघ्र ही स्खलित
होजाते हैं। मेरे पास २५ पच्चीस वर्षों में लाखो रोगी पुरुषों की
चिट्ठियां और उनकी स्त्रियां पुरुषों की चिकित्सा के लिये आई
चिट्ठियां देखने से और स्त्रियों के द्वारा मालूम हुआ है कि
सैकड़ा पीछे निन्यानवे पुरुष शीघ्रपात स्वप्नदोष शिथिलता और
नपुंसकता से ग्रसित हैं इस कारण वे शीघ्र ही स्खलित होते हैं।