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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 52

दाम्पत्य प्रेम और स्वर्ग १५

तथा धर्म्मार्थ कामानां त्रिवर्ग फलमश्नुते ।
पत्नी ही गृहस्थाश्रम की जड है। यदि स्त्री पति की इच्छा-
नुगामिनी हो तो गृहस्थाश्रम की तुलना ( बराबरी ) किसी से
भी नहीं हो सकती और स्त्री के सहित पति धर्म, अर्थ, काम, इन
तीनों फलों को भोगता है ।
धर्म से शुभ कर्म, अर्थ से धन सम्पत्ति और काम से उत्तम
सन्तान की प्राप्ति होती है ।
अनुकूल कलत्रोयस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ।
प्रतिकूल कलत्रस्य नरको नात्रसंशयः ॥
स्त्री के अनुकूल होने पर अर्थात् पति से पत्नी का सच्चा प्रेम
और सन्तुष्टता होने पर इसी लोक में स्वर्ग का भोग होता है
अर्थात् आनन्द और सुख मिलता है। यदि स्त्री प्रतिकूल हुई अर्थात्
स्त्री पति में प्रेम न हुआ सन्तुष्टता न हुई तो इस लोक में ही
नरक भोग होता है इसमे कुछ भी सन्देह नहीं है। इन दोनों बातों
का अनुभव बहुतेरे पति पत्नियों को होगा । वे ही दाम्पत्य प्रेम
और परस्पर की सन्तुष्टता का तथा असन्तुष्टता का सुख दुःख
समझते होंगे ।
शास्त्रकारों ने बतलाया है किः-
न कामेषु न भोगेषु नैश्वर्य्ये न सुखे तथा ।
स्पृहा यस्या यथा पत्यौ सा नारी धर्म्म भागिनी ॥