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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 53

१६ भूमिका
जो स्त्री काम, भोग ऐश्वर्य और सुख किसी की भी अभि-
लाषा नहीं करती केवल स्वामी के प्रेम मे ही सन्तुष्ट है वही स्त्री
धर्मलाभ करती है।
यहां देखा जाता है कि शास्त्रकारो के इन वाक्यो से बिलकुल
विरुद्ध व्यवहार हो रहा है। सैकड़ा पीछे निन्यानवे पुरुष
अधिक विषय, अनियम रतिक्रिया के कारण प्रमेह सुस्ती स्वप्रदोष
शीघ्रपात और नपुसकता आदि रोगों मे घिर जाते है जिस के
कारण पत्नी को किसी प्रकार भी सन्तुष्ट नही कर सकते। वे पत्नी
को भी रोगी बना देते है इसलिये पति पत्नी रोगी सन्तान उत्पन्न
कर घर भर की चिकित्सा में धन की वरबादी करते हैं और सुख-
मय जीवन नष्ट कर देते हैं।
बहुतेरे पुरुष विवाह होने के पहिले ही अनेक प्रकार से वीर्य
का सत्यानाश मार बैठते है। जो विवाह होने के पहिले बचे भी रहे वे
विवाह होते ही अधिक और अनियम रतिक्रिया करके शक्ति हीन
रोगी निर्बल और दुर्बल होजाते हैं तथा स्त्रियो को भी रोगी बना
देते हैं इस प्रकार पति पत्नी रोगी हो दुःखमय जीवन व्यतीत
करते हैं।
आमदनी कम, खर्च ज्यादा होने के कारण ऐश्वर्य और सुख
भोग से भी स्त्रियों की अभिलाषा पूरी नही होती इसलिये सैकडा
पीछे निन्यानवे दम्पति ऐसे मिलेगे जिनमें उपयुक्त प्रेम नहीं होता
उसी कारण गृहस्थी का सुख जैसा चाहिये नहीं मिलता। बल्कि
दाम्पत्य जीवन दुखमय हो जाता है।