विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ भूमिका
देखने मे आता है कि प्राय. पति पत्नी से अनेक प्रकार की अस-
न्तुष्टता वनी ही रहती है इसका कारण यह है कि पुरुष स्त्री के
महत्व को नही समझता इस कारण पति के जो नियम और
कर्त्तव्य हैं उनमें सैकड़ा पीछे दो ही चार पति उनका पालन करते
होंगे । उन्ही का जीवन स्वर्ग-सुख का अनुभव करता होगा । जो
इस ओर ध्यान नहीं देते वे सुखी कैसे रह सकते हैं ।
याज्ञवल्क्य ऋषि कहते है.—
यत्रानुकूल्यं दम्पत्योस्त्रिवर्गस्तत्र वर्द्धते ।
जिस घर मे स्वामी और स्त्री की परस्पर अनुकूलता है उस
घर मे धर्म, अर्थ, काम इन तीनो की वृद्धि होती है। अर्थात् पार-
स्परिक धर्म पालन मे धर्म्म कार्यों की वृद्धि होती है। उस घरमे धर्म्म का
वास होता है और धन सम्पत्ति की उन्नति होती है । उत्तम सन्तान
उत्पन्न होती है । जिस घर मे पति पत्नी एक दूसरे को सन्तुष्ट
नहीं कर सकते उस घर मे कलह रहती है । धन सम्पत्ति और
सन्तान से वह घर दुखी रहता है अर्थात् वे पति पत्नी धन से
दुखी और सन्तान से दुखी रहते हैं तात्पर्य यह है कि उस घर
में बालक रोगी निर्बल दुर्बल और कम आयु वाले होते हैं । उस
घर के मनुष्य धन हीन होते हैं। क्योकिशास्त्रकारो ने बतलाया है:-
पत्नी मूलं गृहं पुसां यदिच्छन्दोऽनुवर्तिनी ।
गृहाश्रमसमं नास्ति यदि भार्या वशानुगा ॥