विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 462, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३१५
उसी तरह महाराज युधिष्ठिर और अर्जुनादि जैसे महापराक्रमी
पांडवों को भी पितामह ने कितना कंपायमान कर दिया था और
अन्त मे कुरुक्षेत्र के युद्ध मे शरीर के रग २ से बांधे जाने पर
भी उनको कुछ कष्ट नहीं हुआ था, भीष्म पितामह की इस असा-
धारण शक्ति का कारण यही था कि उन्होने जीवन भर ब्रह्मचर्य
का पालन किया था । उनकी मृत्यु उनकी इच्छा से हुई थी । यह
सब ब्रह्मचर्य का ही प्रताप था ।
प्राचीन काल मे केवल पुरुष ही ब्रह्मचर्य का पालन नही
करते थे स्त्रियां भी ब्रह्मचर्य का पालन करती थी । अब तो
ब्रह्मचर्य की ओर किसी का ध्यान ही नही है ।
ब्रह्मचर्य के अभाव से हानि
आजकल के समय में पुरुष का वीर्य जल्दी पकता है इस के
अनेक कारण हैं । इसीसे बहुत समय तक अर्थात् ऊपर कहे हुये
समय तक पुरुष अपने वीर्य को नहीं रोक सकता है । इसका
कारण केवल इतना ही है कि ब्रह्मचर्य का पालन ठीक २ नहीं
हो सकता । यदि इन दिनो अष्टविधि ब्रह्मचर्य का यथार्थ पालन
करने में आवे तो पुरुष के वीर्य की पुष्टि भी बड़ी उमर मे ही
होगी यह बात हर कोई समझ सकता है ।
ब्रह्मचर्य के नियमो पर चलने वाले मनुष्य अपनी शारीरिक
सम्पत्ति की रक्षा कर सकते हैं । आरोग्यता और दीर्घ जीवन
प्राप्त कर सकते हैं इतना ही नही वरन नियमों के अनुसार