विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१६ आनन्द मन्दिर
चलने वाले अपनी भविष्य सन्तान को भी उन्नति पर पहुंचा सकते
हैं क्योंकि ब्रह्मचर्य पालन करने वाले की सन्तान पूरे २ अंगवाली,
निरोगी, हृष्ट पुष्ट, बलवान, बुद्धिमान, पराक्रमी, भाग्यशाली, और
बढ़ी उमरवाली होती है । इससे उलटी रीति मे ब्रह्मचर्य को
व्यर्थ समझ विषय व्यापार मे लगजाने वाले की सन्तान अधूरे
अङ्ग वाली, हीन वीर्य, मूर्ख, रोगी, कृश, निर्बल, पराक्रम रहित,
और कम आयु वाली होती है ।
ब्रह्मचर्य के न पालने के दो मुख्य कारण हैं एक तो आज
कल के विद्याभ्यास के ढंग की अयोग्यता और दूसरा आजकल
के विवाह आदि की बुरी प्रथा । आजकल यदि विद्याभ्यास तथा
विवाहादिक क्रम उचित रीति पर हो तो ब्रह्मचर्य का पालन
कुछ भी कठिन मालूम नही होगा । प्राचीन काल में विद्याभ्यास
तथा विवाह आदि का ऐसा अच्छा क्रम था कि बालकों
को कुछ भी कष्ट उठाये विना विद्याभ्यास, ब्रह्मचर्य पालने तथा
बहुत दिन तक वीर्य को रोक रखने का मौका सहज ही मिल
जाता था ।
इस जगह प्राचीन विद्याभ्यास का ढग और प्राचीन विवाह
क्रम पद्धति की उत्तमता दिखलाये विना हाल के विद्याभ्यास और
विवाह क्रम की अहीनता अनुभव में कदापि नही आसकती ।
अतएव संक्षेप मे यहां पर इस विषय पर प्रकाश डालना अनु-
चित न होगा और पाठक भी प्राचीन तथा नवीन शिक्षा प्रणाली
का ढंग समझ लेंगे ।