विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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देखने में आता है। प्रथम तो आठ वर्ष की उमर में अपनी
जाति की रीति के अनुसार उपनयनादि सस्कार होता था फिर
विद्याभ्यास आरभ होता था। भारत वर्ष के अधिकांश नर नारी
इसप्रकार कम से कम १६ और २४ वर्ष ब्रह्मचर्य का पालन तो
किया ही करते थे ।
आदि कवि वाल्मीकि कृत रामायण तथा महात्मा व्यास
कृत महाभारत को देखने से मालूम होता है कि हनुमान और
भीष्म पितामह जीवन पर्यंत ब्रह्मचारी रहे थे। उन्होने असाधारण
और मनुष्य की कल्पना मे न आने योग्य जो २ पराक्रम किये थे
सब केवल उनके ब्रह्मचर्य का ही प्रभाव था । श्री हनुमान जी
का जीवन चरित्र तो सब जानते ही होंगे कि जो अपने स्वामी
श्रीरामचन्द्र की आज्ञा मानकर ब्रह्मचर्य के प्रभाव से मनुष्यों को
अचम्भे मे डालने वाले सौ योजन लम्बे समुद्र को तैर कर
पार कर गये थे और जिन्होने असख्य बलवान राक्षसो के बीच
में अपनी अलौकिक शक्ति दिखाकर रावण जैसे महावीर योद्धाओ
को जीतकर ऐसा काम कर दिखाया था कि जिससे सारी पृथ्वी
में उनका नाम आज तक शूरवीरो की गणना मे पहिले आता है।
और सब जिसके ब्रह्मचर्य की धाक मानते हैं ।
उसी तरह भीष्म पितामह का वृत्तान्त भी सब लोगों को
मालूम होगा कि जिन्होने महाभारत के युद्ध में कौरवो की रक्षा
के लिये उनका पक्ष स्वीकार कर श्रीकृष्ण जैसे रणवीर योद्धा की
प्रतिज्ञा भंग करवाकर अपनी प्रतिज्ञा अखंड कर दिखाई थी