विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८४ आनन्द मन्दिर
से नाना प्रकार के प्रमेह स्वप्नदोष शीघ्रपात आदि रोग हैं। ऐसे
निर्बल वीर्य के द्वारा विपरीत रति से गर्भ रहने पर भी कुम्भिक
नपुंसक उत्पन्न होता है ।
स्वेगुदे ऽब्रह्मचर्याद्यःस्त्रीपुपुंवत्प्रवर्तते,
कुम्भिकः सतुविज्ञेयः ॥
कुम्भिक नपुंसक सम्भोग नहीं कर सकता जब वह पुरुष
किसी पुरुष से अपनी गुदा मे मैथुन करावे तब उसकी इन्द्री में
चैतन्यता आवे तब वह पुरुष के समान स्त्री के साथ प्रसंग कर
सकता है । ये कुम्भिक नपुंसक के लक्षण हैं ।
ईर्ष्यक नपुंसक
ईर्ष्याभितापावपिमन्दहर्षा-
दीर्ष्याह्वयस्यापिवदन्तिहेतुम् ॥
सम्भोग के समय पति पत्नी दोनों चित्त मे किसी से ईर्ष्या
द्वेष का भाव रक्खे हो और चित्त मे इसी विषय की चिन्ता हो
उस दशा मे जो गर्भ रह जावे उससे ईर्ष्यक नपुंसक उत्पन्न
होता है ।
दृष्ट्वाव्यवायमन्येषांव्यवाये यः प्रवर्त्तते ।
ईर्ष्यकः सतुविज्ञेयो दृग्योनिरयमीर्ष्यकः ॥
इसका अर्थ यह है कि जो पुरुष अन्य पुरुष को स्त्री प्रसंग