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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २८५
करते देखे तब उसकी इन्द्री में चैतन्यता हो और वह स्त्री प्रसंग
करने के योग्य हो अर्थात् जब तक दूसरे को मैथुन करते न
देखे तब तक वह स्वयं मैथुन नहीं कर सकता । इसका कोई
इलाज आयुर्वेद में नही बतलाया। इसका यही इलाज है कि वह
पुरुष दूसरे पुरुष को स्त्री प्रसंग करते देखे तब उसकी इन्द्री मे
चैतन्यता उत्पन्न हो ।
पाठक पाठिकाओ ! देखिये किसी से ईर्ष्या द्वेप करना कितना
बुरा है । थोड़ी ही सी भूल में इसका प्रभाव सन्तान पर कैसा
बुरा पड़ता है। इसीलिये आयुर्वेदाचार्यों ने बतलाया है कि
संभोग के समय स्त्री पुरुष दोनो प्रसन्न चित्त हों । पुरुष को
चाहिये स्त्री को अनेक प्रकार से आलिंगन चुम्बन आदि प्यार करके
प्रसन्न करे और आप भी प्रसन्न चित्त हो । सब चिंता शोक
क्रोध आदि भुला देना चाहिये, ऐसी आयुर्वेद की आज्ञा है ।
स्त्री के नपुंसक होने का कारण
जिस प्रकार पुरुष माता पिता की अज्ञानता से नपुंसक
होता है उसी प्रकार स्त्री भी नपुसक होती है । स्त्रियों मे दो
प्रकार की नपुंसक होती हैं, एक तो वह जिसकी इच्छा ही संभोग
की न हो इस लिये उसके कभी गर्भ नही रहता । यह नपुंसक
स्त्री मासिक धर्म्म से भी नही होती । यह नपुंसक स्त्री इस
प्रकार उत्पन्न होती है कि संभोग के समय मूर्खता वश पुरुष
स्त्री को अपने ऊपर करके जैसा कि आजकल के अनेक काम-