विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६२ आनन्द मन्दिर
जरा और एक ऊंचे दिमाग वाले महाशय का विचार
सुनिये एक पुस्तक मे लिखते हैं:—
“जव पुरुष समझे कि वीर्य का स्तम्भन नही होता निकलना
ही चाहता है तव अपने हाथ की दो अंगुलियो से अपनी इन्द्री
के नीचे और गुदा के ऊपर वीच के स्थान मे जो वीर्यपात
करने वाली नस है उसे खूव जोर से दवा रक्खे इस प्रकार वीर्य
स्खलित न होगा वाहर निकलता हुआ भी भीतर लौट जावेगा ।
और सभोग वाले की इच्छा पूरी होगी ।”
इस प्रकार जव वीर्य स्खलित होने को हो तव लौटाल देवे
इस उपाय से चाहे जितनी देरी तक वीर्य को स्तम्भन कर सकता
है । यह भी न हो सके तो संभोग करने के शुरू से ही उस नस को
पकड़े रहे इत्यादि । ये सव वाते कितनी रद्दी और अनुचित
हैं। पुस्तको के लेखक या मूढ पुरुष समझते हैं कि इस प्रकार
वीर्य स्खलन करने से तो वस वैकुण्ठ का दरवाजा ही खुल जायगा
और स्त्री स्खलित होकर पति की वीरता और मर्दानगी के वड़े