विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र २६३
सावधान
ऐसे हानिकारक उपाय कभी नही करना चाहिये । निकलते
हुए वीर्य को भूलकर भी किसी अज्ञानी की वातो मे आकर
रोकना नही चाहिये ।
जो उपाय ऊपर वताया गया है उसी के अनुसार स्त्री को
पूरी तरह से सच्चे स्नेह, हृदय से प्यार करके, स्त्री के प्रसन्न होने
पर संभोग आरम्भ करना चाहिये और एक दूसरे मे ध्यान लगा-
कर चिन्ता रहित हो खूब प्रसन्नता से भली भांति सभोग करना
चाहिये ।
यहां एक वात और ध्यान देने योग्य है । यदि पति को किसी
प्रकार का वीर्य दोष नहीं है, गरमी सुजाक प्रमेह कुछ नहीं है
तो ऊपर के उपाय से संभोग करने से स्त्री की अवश्य तृप्ति होगी
इस वात की भूलकर भी कोशिश नही करनी चाहिये कि स्त्री
हमसे पहिले स्खलित हो परन्तु इस वात का अवश्य ध्यान रखना
चाहिये कि दोनो साथ स्खलित न होने पावे यदि स्त्री पति के
बाद् स्खलित होगी तो गर्भ रहने पर कन्या उत्पन्न होगी और पति
पहिले स्खलित होगा तो पुत्र उत्पन्न होगा ।
ध्यान रखना चाहिये, यदि पति मे