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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 398

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २६१
सभोग के समय व्यर्थ की बातो का विचार करना सन्तान को
उसी प्रकार का वनाना है ।
लिखा है “इस उपाय से पुरुष स्खलित न होगा । स्त्री पहिले
हो जावेगी तब वड़ा आनन्द आवेगा इत्यादि।” वाहरी मूर्खता !
क्षणिक आनन्द के लिये और स्त्री को स्खलित करने के लिये कैसे
कैसे उपाय वाली पुस्तके प्रकाशित होरही हैं !
और सुनिये एक और ऐसी ही पुस्तक मे लिखा है—
“अनेक उपाय करने पर भी यदि वीर्य स्तम्भन न हो, स्खलित
होने का समय आही जावे तो कुछ देरी के लिये प्रसंग करने से
रुक जावे। थोड़ी देरी बाद फिर आरम्भ करे। इसी प्रकार जब
वीर्य स्खलित होने का समय आवे तभी रुक जावे । इस अद्भुत
उपाय से पुरुष जितनी देरी तक चाहे उतनी देरी तक स्तम्भन
कर सकता है ।”
पाठको ! यह बुद्धिमानी देखिये । इसके लेखक महाशय को
यह पता नही कि निकलते हुये वीर्य को रोकने से कितनी
अधिक स्वास्थ्य को हानि होती है। मूत्रकृच्छ्र, पथरी आदि अनेक
रोग होजाते है। यही नही और भी भयकर रोग उत्पन्न होते है।
बलिहारी है इस बुद्धिमानी को कि स्त्री के स्खलित करने के
लिये तथा क्षणिक आनन्द के लिये और स्त्री से अपनी वीरता
का सर्टीफिकेट लेने के लिये अपने शरीर का सत्यानाश मारलेना
और फिर पुस्तक लेखको के नाम को जीवन भर रोना । ऐसी
पुस्तको और लेखकों से ईश्वर बचावे ।