विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११८ आनन्द मन्दिर
संवाहितो रणत्कणत्करहस्ततालै-
र्धन्यःस्वहर्म्य समये विचिनोति निद्राम् ॥
बसन्त में जो पहिले गान सुनते। गान सुनने के पश्चात् विधि
पूर्वक अर्थात् आयुर्वेद के कहे अनुसार स्त्री संभोग करते, तथा
स्त्री के साथ प्रेम पूर्वक बडे स्नेह से झूला झूलते और फिर
शयन कर वसन्त की राते व्यतीत करते हैं वे धन्य हैं।
भाग्यवान पुरुष ही वसन्त के इस आनन्द का सुख भोग
करते हैं।
स्निग्धश्चन्दन कुंकुम प्रभृतिभिः कर्पूर संमिश्रितैः ।
शय्यां धूपितधौतवस्त्र रचितामास्थाय रम्ये गृहे ॥
गाढालिङ्गनचुम्बनादिरचितैः संवर्द्धयन्मन्मथं ।
सेवेत्तां प्रमदां वसन्त समयेश्लेष्मक्ष्यार्थं पुमान् ॥
कपूर मिश्रित चन्दन और कुंकुम आदि से स्निग्ध, अगर
की धूनी से धूपित और उज्ज्वल दूध के झाग की समान सफेद
वस्त्रों से सजे हुए बिछे पलग पर जो अपनी प्यारी पत्नी से
प्रेम पूर्वक कामोद्दीपन करते हुए वसन्त मे बढ़े हुए कफ
को शान्त करने के लिये दाम्पत्य सुख का आनन्द भोग
करते हैं वे आरोग्यता से सुख सहित वसन्त को व्यतीत
करते हैं।"इस ऋतु मे स्त्री के साथ जल विहार भी करना चाहिये।