विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ११७
महात्मा भर्तृहरिजी ने ठीक कहा है:—
स्त्री मुद्रां झषकेतनस्य जननीं,
सर्वार्थ सम्पत्करीं ।
ये मूढाः प्रविहाय यांति कुधियो-
मिथ्याफलान्वेषिणः ।
अर्थात्—स्त्रियां कामदेव की मुद्रा हैं सब अर्थ और सम्पत्ति
की करने वाली हैं अर्थात् सब सुखो की देनेवाली हैं। जो मूढ
कुबुद्धि उन्हें छोड़ कर स्वर्ग पाने की इच्छा से निकल भागते
हैं उन्हें विरक्त के वेष में न समझो ।
ते तेनैव निहत्य निर्दयतरं,
नग्नीकृता मुण्डिताः ।
केचित्पञ्चशिखीकृताश्च जटिलाः,
कापालिकाश्चापरे ॥
किन्तु कामदेव ने दया त्याग कर दंड देकर उन्हें नङ्गा किया
सिर मुड़वाकर किसी के पांच चोटी रखवाई किसी के हाथ में
ठीकरा देकर भीख मगवाई । ऐसे पुरुषों के लिये बसंत ही क्या
कोई ऋतु सुखकारक नहीं है ।
गीतान्त