विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११० आनन्द मन्दिर
अर्थात्—कस्तूरी केशर चन्दन आदि सुगन्धित पदार्थों का
शरीर में लेप किये हो और अगर धूप आदि की सुगन्धि से
सुगन्धिन वस्त्र धारण किये हो ऐसी अपनी सुन्दर भार्या को इस
शिशिर मे स्नेह पूर्वक प्यार न किया उस पुरुष का जीवन व्यर्थ गया ।
मन्दं मन्दं दिनान्ते ज्वलति हुतवहः,
पृष्ठतः पार्श्वतो वा ।
धन्यो लोकस्तरुण्याः स्तनजघनपरी-
रंभसंभोगसंगी ॥
अर्थात्—सांयकाल मे मन्द मन्द अग्नि जल रही हो जिससे
आगे पीछे गरमाहट हो रही हो। ऐसे समय मे इस शिशिर मे जो
पुरुष अपनी प्यारी युवती पत्नी के साथ प्रेम और स्नेह से ऊंचे
ऊंचे रूई के गद्दो पर विलास और शयन करते हैं। वे पुरुष धन्य
हैं। उन्ही का दाम्पत्य जीवन प्रेम आनन्द और सुख से व्यतीत
होता है।
क्वापि तैलं सुगन्ध्यं ताम्बूलं तत्तभोज्यं ।
तरुणिविरचितं वासरे शैशिरेऽस्मिन् ॥
कभी तैल की मालिस कराना, कभी सुगन्धियो से शरीर को
तर बतर करना, पानो का चवाना और अपनी प्यारी स्त्री का प्रेम
पूर्वक स्नेह सहित बनाया हुआ गरमागरम भोजन करना इस
शिशिर मे अत्यन्त हितकारी है।