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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १०६
शिशिर मे पानी का अचार अदरक, आम, टेंटी, लहसोडा
छुहारा आदि का अचार और हींग तथा सेंधा नमक पडे हुए
तथा घी मे बनाए हुए पदार्थों का सेवन करना चाहिये और
अपनी भार्या (स्त्री) को प्रेम और स्नेह से सेवन कर दाम्पत्य
जीवन का आनन्द भोगना हितकारी है।
आयुर्वेद ऋतुचर्या के आनन्द भोग के लिये और दाम्पत्य
सुख का अनुभव तथा आरोग्यता के लिये बतलाता है:--
मत्तेभकुम्भ परिणाहिनि कुङ्कुसार्द्र-
कान्तापयोधरतटे रतिभारखिन्ने ।
वक्षो निधाय भुजपञ्जरमध्यवर्ती-
धन्यः क्षपां क्षपयति तृणवत्स धन्यः ॥
अर्थात्—मतवारे हाथी के कुम्भस्थल को लजाने वाले, केशर
आदि सुगन्धित पदार्थों से सुगन्धियुक्त, कान्ता के स्तनों को दोनों
भुज पंजरो के मध्य मे ले हृदय से हृदय लगाकर अपनी प्यारी स्त्री
के साथ दाम्पत्य सुख का भोग करते हुए जो पुरुष शिशिर