विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 163, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ें६४ आनन्द मन्दिर
उस स्त्री की जबानी मालूम हुआ कि वह ठीक २८-या २९
वें दिन इसी कष्ट से ऋतुधर्म्म मे होती है और कई वर्ष से उसके
मासिकधर्म्म का यही हाल है। प्रतिपदा से पीडा आरम्भ होती थी
और चौदह पन्द्रह दिन में खूब बढ़ती थी। मासिकधर्म्म के एक
दिन पहले पीड़ा इतनी अधिक बढ़ती थी कि उसे नशीली औष-
धियों के इञ्जेक्शन लगवाने पड़ते थे जिससे पीड़ा मालूम न हो।
मेरे यहां वह दो तीन महीने रही। हर महीने उसे इसी प्रकार का
कष्ट होता था।
मैंने उससे पूछा तो मालूम हुआ उसे जब से मासिकधर्म्म
आरम्भ हुआ तब से ही वह ठीक २८ वें दिन मासिकधर्म्म से
होती रही है। विवाह के बाद अधिक प्रसग के कारण उसके
मासिकधर्म्म मे यह खराबी उत्पन्न होगई कि कष्ट से होने लगा और
बहुत अधिक होने लगा। मेरे यहां तीन महीने रहकर उसने इलाज
कराया। तब सब शिकायते दूर हुईं और वह अपने घर को गई।
इस प्रकार अनेक ऐसी स्त्रियों के रोगो से निश्चय होता है
कि स्त्रियो का आर्तव वास तिथि के हिसाब से होता है।
स्त्रियों के ये भेद और लक्षण कामशास्त्रो में ही बतलाये
गये हैं। अन्य धर्म ग्रन्थो तथा आयुर्वेद शास्त्रो में यह तो बतलाया
गया है कि किन चिन्हों वाली लड़की की कैसा स्वभाव होता है
और कैसी लड़की से विवाह करना चाहिये तथा विवाह के समय
किन बातो का ध्यान रखना चाहिये। सम्भव है उन्ही ग्रन्थो के
आधार पर कामशास्त्र में ये भेद किये गये हों।