विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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अमृत और विष
वैद्यकशास्त्र मे अमृत और विष दोनों प्रकार की औषधियो
की विधि और सेवन बतलाया गया है। विष से जो औषधियां
विधि पूर्वक तैयार कर पथ्य से सेवन की जाती हैं वे विषों द्वारा
तैयार हुई औषधियां अमृत का काम कर दिखलाती हैं।
जो मूर्ख उन्हें बिना समझे ही तैयार कर अथवा अज्ञानी
चिकित्सकों की तैयार की हुई औषधियां सेवन करते हैं वे
अमृत की समान गुणकारी होने पर भी विष की समान प्राण
नाशक हैं।
इसी प्रकार अमृत की समान औषधियां बिना जरूरत के
सेवन की जावे तो वे भी विष की समान हानि कारक होती हैं।
इसका तात्पर्य यह है कि:—
सन्तान की इच्छा से संभोग के समय स्त्री को प्यार और
प्रेम से आलिंगन चुम्बनादि से प्रसन्न करके सीधे आसन से संभोग
करे, नोच खसोट आदि से नही। जब स्त्री पति के प्यार से प्रसन्न
होगी तब संभोग मे भी उसकी इच्छा पूरी होगी और वह
स्खलित होकर गर्भधारण करेगी।
इसका मूर्ख लोग यह आशय समझते हैं कि स्त्री को आलि-
गन चुम्बन आदि उपायो से पुरुष के साथ ही स्खलित होना
चाहिये उन मूर्खों को यह नही मालूम है कि स्त्री पुरुष एक साथ
स्खलित होने से यदि गर्भ रह गया तो नपुंसक सन्तान उत्पन्न होगी।