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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 137

किया और योग मे ध्यान न दिया उस मनुष्य का जीवन
व्यर्थ गया ।
रम्भा बोली—
चन्द्रानना सुन्दर गौर वर्णा,
व्यक्तस्तनी भोग विलास दक्षा ।
नान्दोलिता वैशयनेषु येन,
वृथागतं तस्य नरस्य जीवनम् ॥
हे मुने ! चन्द्रमा के समान मुख वाली, सुन्दर और गौर वर्ण
वाली, भोग विलास मे चतुर, प्यारी पत्नी का जिसने सेवन नही किया
उस मनुष्य का जीवन व्यर्थ गया ।
शुकदेव जी बोले—
स्वरूपं शरीरं नवीनं कलत्रं,
धनं मेरुतुल्यं वचश्चारुचित्रम् ।
हरेरंघ्रियुग्मे मनश्चेन्नलग्नं,
ततःकिं ततःकिं ततःकिं ततःकिम् ॥
शुकदेव मुनि कहते है कि जिसने विष्णु भगवान के चरणो में
मन् नही लगाया उसके सुन्दर नवीन यौवनवती स्त्री तथा सुमेर
पर्वत के समान धन, सुन्दर विचित्र वाणी आदि सब प्रकार के
सुख भोग होने से क्या हुआ अर्थात् कुछ भी नही हुआ । ऐसा
मनुष्य जीवन व्यर्थ ही गया इस लिये यह सब निरर्थक है ।