विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कालशास्त्र ७६
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रम्भा बोली—
आनन्द रूपा तरुणीलतांगी,
सद्धर्मसंसाधन सृष्टिरूपा ।
कामार्थदा यस्य गृहे न नारी,
वृथागतं तस्य नरस्य जीवनम् ॥
हे मुने ! स्त्री पुरुष को आनन्द देने वाली, मनको मोहित
करने वाली, युवावस्था से पूर्ण अंगवाली, पतिव्रता, सृष्टि की आदि
धर्म्म को साधने वाली, सन्तान उत्पन्न करने वाली पुरुषो की
सब कामनाओ को पूर्ण अर्थात् काम अर्थ को देने वाली सुन्दर
पत्नी जिसके घरमें नहीं है, उस नर का जीवन व्यर्थ है ।
शुकदेव जी बोले—
पत्न्यार्जितं सर्वं सुखं विनश्वरं,
दुःखप्रदं कामिनि भोग सेवितम् ।
एवं विदित्वा न धृतोहि योगो,
वृथागतं तस्य नरस्य जीवनम् ॥
पत्नी के विषय भोग से होने वाले सब सुखो को अनित्य
और दुखदाई जानकर जिसने योगाभ्यास धारण कर परमात्मा
का ध्यान नहीं किया उसका जीवन व्यर्थ गया, उसने इस शरीर
को नष्ट कर दिया ।