विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ७७
गदाधारी, पीताम्बरधारी, कौस्तुभमणि की माला से सुशोभित ऐसे
भगवान् को जिसने बोध काल में स्वस्थ जाग्रत अवस्था में ध्यान
में धारण नहीं किया उस नर का जीवन व्यर्थ ही गया।
रम्भा बोली —
विचित्र वेषा नवयौवनाढ्या,
लवङ्ग कर्पूर सुवासि देहा।
नालिंगिता येन दृढं भुजाभ्यां,
वृथागतं तस्य नरस्य जीवनम् ॥
हे मुने ! विचित्र वेष ( शृंगार ) वाली, युवावस्था से पूर्ण,
सुन्दर यौवनवती, कर्पूर आदि सुगन्धित पदार्थों से सुवासित
शरीर वाली स्त्री पाकर जिस पुरुष ने उसे आलिंगन कर आनन्द
भोग नहीं किया उसका जीवन व्यर्थ गया।
शुकदेव मुनि कहने लगे—
विश्वम्भरो ज्ञानमयः परेशो,
जगन्मयोऽनन्तगुण प्रकाशः ।
नाराधितोनोऽपिकृतंनयोगे,
वृथागतं तस्य नरस्य जीवनम् ॥
अर्थात्—जगत् के पालक पोषक ज्ञानमय, जगद् रूप, अनन्त
गुणों को प्रकाशित करने वाले, परमात्मा का जिसने ध्यान नहीं