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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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६८ आनन्द मन्दिर
वृद्धि करता रहे। पूर्व जन्म के किये हुए पुण्य और शुभकर्मों से
ही मनुष्य को इस जन्म मे धन सम्पत्ति और सांसारिक सब
सुख तथा सुन्दर स्त्री भोगने मे आती है।
यदि शुभकर्म न किये हो और पूर्व जन्म का किया हुआ
पुण्य इस जन्म मे साथ न दे तो धन सम्पत्ति और ससार के सभी
बहुमूल्य पदार्थ तथा सुन्दर रूपवती स्त्री होने पर भी भाग्यहीन पुरुष
भोग नही सकते। यह निश्चय वेद शास्त्र सम्मत है कि शुभ कर्मों
से ही मनुष्य सुख भोग करता है। शुभ कर्म न किये हों तो
सांसारिक सभी पदार्थों से वह मनुष्य हीन रहता है और यदि
कुछ पदार्थ कर्मों से प्राप्त भी हो तो उन्हे भोग नहीं सकता
केवल चौकीदारी करता है।
मुझे २५ वर्ष स्त्रियो की चिकित्सा करते हुए व्यतीत हुईं, इस
बीच मे मैंने लाखो ही स्त्रियो और स्त्रियो द्वारा उनके पतियो
की चिकित्सा कर इस विषय के हजारो उदाहरण पाये।
कई वर्ष व्यतीत हुए, एक रियासत से मेरे पास एक बडे भारी
जिमीदार अपनी स्त्रियो को लेकर इलाज के लिये आये जिनके छै
स्त्रियां थीं। उन जिमीदार की अवस्था लगभग चालीस वर्ष की थी।
उन्होंने सन्तान के लिये छै विवाह किये। उनकी आमदनी कई-
लाख रुपया सालाना की थी। उनकी स्त्रियो की जबानी मुझे
मालूम हुआ कि वे इतने सुस्त थे कि छै स्त्रियो से विवाह करके
एक स्त्री से भी एक बार भी उचित रीति से सभोग नहीं कर सके।
उनकी सब मे छोटी स्त्री की, जिसका हाल मे ही विवाह हुआ