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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 126

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ६६

था, सोलह साल की अवस्था थी और अन्य पांचो स्त्रियां भी
जवान थीं।
उन सब स्त्रियो ने मुझ से अपना २ खुलासा हाल बतलाया
कि विवाह करके एक दिन पति जी पास आये, घंटो उद्योग
करने से उनकी कुछ इच्छा हुई सो भी उचित रीति से नही।
इच्छा होते ही शीघ्रपात हो जाने से बात करते ही सुस्त
हो गये इसी प्रकार सभी स्त्रियो ने अपना अपना हाल मुझसे
खुलासा बतलाया।
उनके भोजनो का यह हाल था कि मूंग की दाल और पुराने
चावल का भात तथा परवल, लौकी की तरकारी के सिवा यदि
कभी पूड़ी खाले या मलाई रबड़ी हलुवा खाले तो दस्त आने
लगे। यदि कब्ज हो जाय तो एक दो सप्ताह तक मूंग की दाल
का पानी भी स्वप्न हो जाय।
उनकी यह दशा होश सम्भालने के समय से ही थी। उन
स्त्रियों ने मुझ से कहा कि हम मे से कोई भी ऐसी नही है कि
जिसने एक दिन भी संभोग सुख का अनुभव किया हो।
उन जिमीदार साहब को और भी अनेक रोग ऐसे थे कि
वे उचित रीति से रतिक्रिया कर ही नही सकते थे सन्तान कैसे
होती। वे शेखी के मारे विवाह करते जाते थे परन्तु किसी
योग्य न थे।
उनकी स्त्रियो को भी उचित संभोग न होने से अनेक रोग