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वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 68, कुल 248 में से

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पृष्ठ 68

४२ वात्स्यायन-कामसूत्र
चुम्बन करे। यह चुम्बन नायिका भी कर सकती है, यदि नायक बिना मूँछों वाला हो। इस
प्रकारका चुम्बन सम्पुटक कहलाता है॥ २०॥
तस्मिन्नितरोऽपि जिह्वयास्या दशनान् घट्टयेत्, तासु जिह्वां चेति
जिह्वायुद्धम्॥ २१॥
अन्तर्मुखचुम्बन—नायक या नायिका द्वारा सम्पुटक चुम्बन करने पर दूसरा अपनी जिह्वा
को चुम्बन लेने वाले के दाँतों, तालु और जिह्वा पर फेरे, तो यह जिह्वायुद्ध कहलाता है॥ २१॥
एतेन बलाद्दशनरदनग्रहणं दानं च व्याख्यातम्॥ २२॥
मुखदन्तयुद्ध—इस जिह्वायुद्ध से ही मुखयुद्ध और दन्तयुद्ध भी कह दिया गया है अर्थात्
जिह्वायुद्ध के समान ही मुखयुद्ध और दन्तयुद्ध भी समझना चाहिये॥ २२॥
समं पीडितमञ्चितं मृदु शेषाङ्गेषु चुम्बनं स्थानविशेषयोगात्। इति चुम्बन-
विशेषाः॥ २३॥
शेषाङ्गचुम्बन—शेष अङ्गों में सुविधानुसार सम, पीडित, अञ्चित और मृदु—ये चार
प्रकार के चुम्बन होते हैं। इस प्रकार चुम्बन के भेद समाप्त हुए॥ २३॥
सुप्तस्य मुखमवलोकयन्त्या स्वाभिप्रायेण चुम्बनं रागदीपनम्॥ २४॥
रागदीपन—सोये हुए नायक के मुख को देखती हुई नायिका द्वारा चुम्बन अनुराग के
दीपन (जागरण एवं रागवर्धन) के कारण 'रागदीपन' कहलाता है॥ २४॥
प्रमत्तस्य विवदमानस्य वाऽन्यतोऽभिमुखस्य सुप्ताभिमुखस्य वा
निद्राव्याघातार्थं चलितकम्॥ २५॥
चलितक—जब नायक नायिका की ओर से असावधान हो, उससे विवाद में लीन हो,
उससे विमुख होकर किसी अन्य विषय में संलग्न हो, अथवा सोने को तत्पर हो, तो उसे नींद
से जगाने के लिये (अपनी ओर ध्यान आकृष्ट करने, विवाद समाप्त करने एवं तन्द्रा दूर करने,
अर्थात् उसे भोगरत बनाने के लिये) जो चुम्बन होता है, उसे चलितक चुम्बन कहते हैं॥ २५॥
चिररात्रावागतस्य शयनसुप्तायाः स्वाभिप्रायचुम्बनं प्रातिबोधिकम्॥ २६॥
प्रातिबोधिक—रात को देर से लौटा नायक, शैय्या पर सोयी हुई नायिका का चुम्बन
अपने अभिप्राय से करे, तो वह चुम्बन प्रातिबोधिक कहलाता है॥ २६॥
सापि तु भावजिज्ञासार्थिनी नायकस्यागमनकालं संलक्ष्य व्याजेन सुप्ता
स्यात्॥ २७॥
इसकी विधि—नायक के प्रेम की परीक्षा करने के लिये नायिका उसके आगमन-काल
को जानकर बहाना बनाकर सो जाये॥ २७॥
आदर्शे कुड्ये सलिले वा प्रयोज्यायाश्छायाचुम्बनमाकारप्रदर्शनार्थमेव
कार्यम्॥ २८॥
छायाचुम्बन—प्रेमप्रदर्शनार्थ दर्पण, दीवार या जल में पड़ रही नायक या नायिका की
छाया का चुम्बन करना चाहिये—यह छायाचुम्बन कहलाता है॥ २८॥
बालस्य चित्रकर्मणः प्रतिमायाश्च चुम्बनं संक्रान्तकमालिङ्गनं च॥ २९॥