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सर्वकोश
वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 66, कुल 248 में से

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पृष्ठ 66

४० वात्स्यायन-कामसूत्र
रागवशाद्देशप्रवृत्तेश्च सन्ति तानि तानि स्थानानि, न तु सर्वजनप्रयोज्यानीति
वात्स्यायनः॥ ६॥
स्थानों पर वात्स्यायन की व्यवस्था—जो व्यक्ति रागवश या देशाचार के कारण जाँघ
आदि स्थानों का चुम्बन करते हैं, ये स्थान उन ही के चुम्बन के योग्य हैं। शिष्टजनों को उनका
अनुकरण नहीं करना चाहिये॥ ६॥
तद्यथा—निमित्तकं स्फुरितकं घट्टितकमिति त्रीणि कन्याचुम्बनानि॥ ७॥
कन्या के चुम्बन—कन्या या नवपरिणीता, जिसने किसी पुरुष के साथ समागम न
किया हो, फलतः जो अक्षतयोनि हो, का चुम्बन तीन प्रकार से होता है—निमित्तक, स्फुरितक
और घट्टितक॥ ७॥
बलात्कारेण नियुक्ता मुखे मुखमाधत्ते न तु विचेष्टत इति निमित्तकम्॥ ८॥
निमित्तक—नायक द्वारा आग्रहपूर्वक चुम्बन के लिये नियुक्त की गयी नायिका जब
अपना मुख नायक के मुख पर रख दे, लेकिन सङ्कोचवश चुम्बन की कोई चेष्टा न करे, तो उसे
निमित्तक चुम्बन कहते हैं॥ ८॥
वदने प्रवेशितं चौष्ठं मनागपत्रपादग्रहीतुमिच्छन्ती स्पन्दयति स्वमोष्ठं
नोत्तरमुत्सहंत इति स्फुरितकम्॥ ९॥
स्फुरितक—नायक द्वारा अपना अधर नायिका के मुख में रख देने पर संकोच के
किञ्चित् शिथिल हो जाने के कारण, जब नायिका के अधर को पकड़ने की इच्छा से अपने अधर
को फड़काये, लेकिन लज्जावश ऊपर के ओष्ठ को न चलाये, तो इस चुम्बन को स्फुरितक
कहते हैं॥ ९॥
ईषत्परिगृह्य विनिमीलितनयना करेण च तस्य नयने अवच्छादयन्ती जिह्वाग्रेण
घट्टयति इति घट्टितकम्॥ १०॥
घट्टितक—लज्जा के कुछ अधिक हट जाने पर जब नायिका, अपने मुख में रखे नायक
के अधर को, अपने ओष्ठों में दबाकर, आँखें बन्द करके तथा अपने हाथों से नायक के नयनों
को भी बन्द करके, जिह्वा के अग्रभाग को उसके ओष्ठों पर रगड़े, तो यह घट्टितक चुम्बन
कहलाता है॥ १०॥
समं तिर्यगुद्भ्रान्तमवपीडितकमिति चतुर्विधमपरे॥ ११॥
शेष नायिकाओं के चुम्बन—नवपरिणीत नायक-नायिकाओं के अतिरिक्त शेष के चार
प्रकार के चुम्बन होते हैं—सम, तिर्यक्, उद्भ्रान्त और अवपीडितक॥ ११॥
अङ्गुलिसम्पुटेन पिण्डीकृत्य निर्दशनमोष्ठपुटेनावपीडयेदित्यवपीडितकं
पञ्चममपि करणम्॥ १२॥
आकृष्ट चुम्बन—अङ्गूठा और तर्जनी अङ्गुलि से नायिका के अधर को गोल करके,
अपने दोनों ओष्ठों से बिना दाँत लगाये ही उसका अवपीड़न 'अवपीडितक' नामक पाँचवाँ
चुम्बन है॥ १२॥
द्यूतं चात्र प्रवर्तयेत्॥ १३॥