वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ वात्स्यायन-कामसूत्र
३०. दुर्वाचकयोगाः—कूट श्लोकों का पूछना और बताना,
३१. पुस्तकवाचनम्—पद्य का रसानुकूल गायन,
३२. नाटकाख्यायिकादर्शनम्—नाटक और कथासाहित्य आदि का परिज्ञान,
३३. काव्यसमस्यापूरणम्—काव्य में समस्यापूर्ति करना,
३४. पट्टिकावानवेत्रविकल्पाः—बेंत और सरकण्डों से चटाई, मूढ़े आदि बनाना,
३५. तक्षकमाणि—आभूषण और बर्तनों पर मीनाकारी,
३६. तक्षणम्—बढ़ईगिरी (लकड़ी का काम),
३७. वास्तुविद्या—भवननिर्माण कला,
३८. रूप्यपरीक्षा—मणि और रत्नों की परीक्षा,
३९. धातुवादः—धातुओं का शोधन एवं मिश्रण,
४०. मणिरागाकरज्ञानम्—मणियों को रँगना और खान आदि का ज्ञान,
४१. वृक्षायुर्वेदयोगः—वृक्षों एवं लताओं की चिकित्सा,
४२. मेषकुक्कुटलावकयुद्धविधिः—भेड़ा, कुक्कुट और लावकों को लड़ाने की विधि,
४३. शुकसारिकाप्रलापनम्—शुक-सारिकाओं को प्रशिक्षित करना,
४४. उत्सादने संवाहने केशमर्दने च कौशलम्—हाथ-पैरों से दबाने (अङ्गमर्दन) तथा सिर की
मालिश की कला,
४५. अक्षरमुष्टिकाकथनम्—सांकेतिक या गुप्त अक्षरों का कथन तथा मुष्टिका—संकेत द्वारा
वार्तालाप,
४६. म्लेच्छितविकल्पाः—अस्पष्ट शब्दों के प्रयोग का अभ्यास,
४७. देशभाषाविज्ञानम्—विभिन्न देशों की भाषाओं का ज्ञान,
४८. पुष्पशकटिका—पुष्पों से गाड़ी आदि बनाना,
४९. निमित्तज्ञानम्—शकुन विचार,
५०. मन्त्रमातृका—स्वचालित यन्त्रों का निर्माण,
५१. धारणमातृका—स्मृतिवृद्धि के साधनों का ज्ञान,
५२. सम्पाठ्यम्—पठित या श्रुत छन्द को यथावत् दोहरा देना,
५३. मानसीकाव्यक्रिया—विक्षिप्त अक्षरों को मन से पूरा करके छन्द रचना करना,
५४. अभिधानकोशः—शब्दकोशों का ज्ञान एवं प्रयोग,
५५. छन्दोविज्ञानम्—छन्दःशास्त्र का ज्ञान,
५६. क्रियाकल्पः—काव्यशास्त्र का ज्ञान,
५७. छलतियोगाः—अनेक रूप धारण करने की कला,
५८. वस्त्रगोपनानि—वस्त्रों के दोषों को छिपाने की कला,
५९. द्यूतविशेषः—द्यूतकला का परिज्ञान,
६०. आकर्षकीड़ा—पासों को अनुकूल फेंकने की कला,
६१. बालकीडनकानि—बालकों के खेलों का ज्ञान,
६२. वैनयिकीनां विद्यानां ज्ञानम्—विनय देने वाली विद्या (आचारशास्त्र) का ज्ञान,