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सर्वकोश
वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 248 में से

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पृष्ठ 38

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१२ वात्स्यायन-कामसूत्र
कामशास्त्रीय प्रयोगों में ही नहीं, शास्त्रानुशील में भी निष्पन्न बुद्धि वाली होती हैं अर्थात् यह
कहना सत्य नहीं है कि स्त्री शास्त्र की अधिकारिणी नहीं होती ॥ ११ ॥
तस्माद्वैश्वासिकाज्नाद्रहसि प्रयोगाञ्छास्त्रमेकदेशं वा स्त्री गृह्णीयात् ॥ १२ ॥
स्त्रियों की कामशास्त्रानुशील की रीति—इसलिये विश्वस्त जन से, एकान्त में,
कामशास्त्र के समस्त प्रयोग, सम्पूर्ण शास्त्र अथवा उसके एक अंग की शिक्षा स्त्रियाँ प्राप्त
करें ॥ १२ ॥
अभ्यासप्रयोज्यांश्च चातुःषष्टिकान् योगान् कन्या रहस्येकाकिन्यभ्य-
सेत् ॥ १३ ॥
अभ्यास से प्रयोज्य चौंसठ कलाओं के प्रयोगों का कन्या को एकान्त में एकाकी ही
अभ्यास करना चाहिये ॥ १३ ॥
आचार्यास्तु कन्यानां प्रवृत्तपुरुषसम्प्रयोगा सहसम्प्रवृद्धा धात्रेयिका।
तथाभूता वा निरत्ययसम्भाषणा सखी। सवयाश्च मातृष्वसा। विस्रब्धा तत्स्थानीया