वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
पृष्ठ 27, कुल 248 में से
संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीः ॥
वात्स्यायन-कामसूत्र
१.
साधारण नामक प्रथम अधिकरण
प्रथम अध्याय
शास्त्रसंग्रह
धर्मार्थकामेभ्यो नमः ॥ १ ॥
मङ्गलाचरण—धर्म, अर्थ और काम को नमस्कार है ॥ १ ॥
शास्त्रे प्रकृतत्वात् ॥ २ ॥
(क्योंकि) इस शास्त्र में मूलतः धर्म, अर्थ और काम का ही उपदेश किया गया है,
अतएव उन्हें ही नमस्कार किया गया ॥ २ ॥
तत्समयावबोधकेभ्यश्चाचार्येभ्यः ॥ ३ ॥
और जिन आचार्यों ने धर्म, अर्थ और कामशास्त्र के तत्त्व को समझाने के लिये तद्विषयक
ग्रन्थ लिखे हैं, उन्हें भी नमस्कार है ॥ ३ ॥
तत्सम्बन्धात् ॥ ४ ॥ इति ॥
त्रिवर्ग से सम्बद्ध ग्रन्थों की रचना करने वाले आचार्यों को नमस्कार करने का कारण यह
है कि उन के ग्रन्थों से संग्रह कर इस 'कामसूत्र' की रचना कर रहे हैं, अतएव उपजीव्य ग्रन्थों
के रचयिताओं के प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन भी आवश्यक है ॥ ४ ॥
प्रजापतिर्हि प्रजाः सृष्ट्वा तासां स्थितिनिबन्धनं त्रिवर्गस्य साधनमध्यायानां
शतसहस्रेणाग्रे प्रोवाच ॥ ५ ॥
कामशास्त्र की प्राचीनता—प्रजापति ने प्रजाओं की सृष्टि कर त्रिवर्ग के साधनभूत
शास्त्र का, जो उनकी स्थिति का कारण या व्यवस्थित जीवन का संविधान है, एक लाख
अध्यायों में प्रवचन किया था ॥ ५ ॥
तस्यैकदेशिकं मनुः स्वायम्भुवो धर्माधिकारिकं पृथक् चकार ॥ ६ ॥
प्रजापति ब्रह्मा द्वारा रचित उस शास्त्र के धर्मशास्त्रविषयक अंश को स्वयंभू के पुत्र मनु ने
पृथक् कर लिया ॥ ६ ॥
बृहस्पतिरर्थाधिकारिकम् ॥ ७ ॥
बृहस्पति ने अर्थशास्त्रविषयक अंश को पृथक् किया ॥ ७ ॥
महादेवानुचरश्च नन्दी सहस्रेणाध्यायानां पृथक् कामसूत्रं प्रोवाच ॥ ८ ॥
कामशास्त्र की परम्परा—महादेव के अनुचर नन्दी ने प्रजापति ब्रह्मा के उस शास्त्र से