वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ वात्स्यायन-कामसूत्र
वेश्याओं की रीति, एक वर्ष तक पत्नीव्रत का निर्वाह, निमन्त्रण पर उपस्थिति आवश्यक,
अभिनेत्री कन्याओं के विवाह की रीति, वैशिष्ट्यकथन।
वशीकरणप्रकरण—वशीकरण लेप, वशीकरण चूर्ण, वशीकरण स्नान, शिश्नलेप,
वांछित कन्या से विवाह की रीति, देवकान्त अनुलेप, गन्धर्वकान्त अनुलेप, नागकान्त अनुलेप,
पुण्य अञ्जन।
वृष्ययोग (वाजीकरण) प्रकरण—वाजीकरण का आशय, उच्चटा और मुलहटी,
मेढ़ा और बकरे का अण्डकोश, विदारीकन्द, वंशलोचन और क्रौंच, चिरौंजी, मुहार और श्वेत
विदारी, क्षीरकाकोली, सिंघाड़ा, कसेरू और महुआ, उड़द की दाल की खीर, विदारीकन्द और
क्रौंच की पूड़ियाँ, गौरैया के अण्डों से भावित खीर, उक्त रीति से भावित तिलों की खीर,
मुलहठी आदि का षडंग अमृतं, शतावरी और गोखरू, शतावरी, गोखरू और श्रीपर्णी, गोखरू
और जौ, उपसंहार, अग्राह्य योग, ग्राह्य योग।
द्वितीय अध्याय १९६-२०३
नष्टरागप्रत्यानयनप्रकरण—समागम के प्रयोजन, चण्डवेग का प्रसादन, नष्टराग की
वापसी का उपाय, अपद्रव्यों का प्रयोग, बाभ्रवीय मत, आचार्य वात्स्यायन का मत, चूड़क,
एकचूड़क, कंचुक या जालक, छेदनकर्म, छेदनविधि, शोधन, छिद्रवर्धन, व्रणशोधन, अपद्रव्यों
का रूप।
वर्धनयोगप्रकरण—वर्धन योग।
चित्रयोगप्रकरण—कन्यामोहन, रागनाशन विधि, योनिसंकोचन, योनिविस्तार, बाल
सफेद करना, बाल काले करना, होंठ सफेद करना, होंठ लाल करना, मोहक वंशी, पागल
बनाना, अच्छा करना, अदृश्य करना, पानी को दूध के समान सफेद करना, लोहे को ताँबे के
समान करना, लकड़ियों का सर्प दिखाना, यश और आयुर्वर्धक दूध, ब्राह्मणों का आशीर्वाद
सदैव हितकर, उपसंहार, शास्त्र का उद्देश्य रागोद्दीपन नहीं, अशिष्टसम्मत योग प्रयोज्य नहीं,
शास्त्रीय ग्रन्थ, निर्माण की अवस्था और प्रयोजन, कामतत्त्वज्ञ कामुक नहीं होता, सिद्धि के लिये
रागात्मकता का अभाव आवश्यक॥
साम्प्रयोगिक आसनों के कतिपय चित्र २०५-२१८