वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
पृष्ठ 227, कुल 248 में से
संदर्भ में पढ़ें७. औपनिषदिक अधिकरण २०१
मदयन्तिकाकुटजकाञ्जनिकागिरिकर्णिकाश्लक्ष्णपर्णीमूलैः स्नानं केशानां
प्रत्यानयनम् ॥ ३९ ॥
बाल काले करना—मेंहदी, कुटज, अंजनिका, पहाड़ी चमेली और माषपर्णी की
जड़—इन पाँचों का चूर्ण सिर पर मलकर कुछ समय बाद स्नान करने से सफेद बाल भी काले
हो जाते हैं ॥ ३९ ॥
एतैरेव सुपक्वेन तैलेनाभ्यङ्गात् कृष्णीकरणात् क्रमेणास्य
प्रत्यानयनम् ॥ ४० ॥
इन पदार्थों से बने तैल से भी सफेद बाल काले हो जाते हैं ॥ ४० ॥
श्वेताश्वस्य मुष्कस्वेदैः सप्तकृत्वो भावितेनालक्तकेन रक्तोऽधरः श्वेतो
भवति ॥ ४१ ॥
ओष्ठ सफेद करना—पूर्वोक्त वस्तुओं में सफेद घोड़ों के अण्डकोश के पसीने की सात
भावनाएँ देने पर जो योग तैयार होता है वह लाल होठों को भी सफेद बना देता है ॥ ४१ ॥
मदयन्तिकादीन्येव प्रत्यानयनम् ॥ ४२ ॥
होंठ लाल करना—मेंहदी आदि को पीसकर लगाने से सफेद होंठ पुनः लाल हो
जाते हैं ॥ ४२ ॥
बहुपादिकाकुष्ठतगरतालीशदेवदारुवज्रकन्दकैरुपलिप्तं वंशं वादयतो या
शब्दं शृणोति सा वश्या भवति ॥ ४३ ॥
मोहक वंशी—बहुपादिका (पोदीना), कुछ, तगर, तालीशपत्र, देवदारू और
वज्रकन्द—इनका लेप करके वंशी बजाने वाले की ध्वनि जो भी स्त्री सुनेगी वही वशीभूत हो
जायेगी ॥ ४३ ॥
धत्तूरफलयुक्तोऽभ्यवहार उन्मादकः ॥ ४४ ॥
पागल बनाना—खाद्य या पेय पदार्थों में धतूरे के बीज मिलाकर खिला पिला देने से
व्यक्ति पागल हो जाता है ॥ ४४ ॥
गुडो जीर्णतश्च प्रत्यानयनम् ॥ ४५ ॥
उसको स्वस्थ करना—पुराना गुड़ खिला देने से धतूरे का विष उतर जाता है ॥ ४५ ॥
हरितालमनःशिलाभक्षिणो मयूरस्य पुरीषेण लिप्तहस्तो यद् द्रव्यं स्पृशति तन्न
दृश्यते ॥ ४६ ॥
अदृश्य करना—हरताल और मैनसिल खाने वाले मोर की विष्ठा को हाथ में लगाकर
जिस वस्तु को छू दोगे, वही अदृश्य हो जायेगी ॥ ४६ ॥
अङ्गारतृणभस्मना तैलेन विमिश्रमुदकं क्षीरवर्णं भवति ॥ ४७ ॥
पानी को दूध के समान सफेद करना—खस की भस्म को तैल में मिलाकर पानी में
डाल देने से पानी दूध के समान सफेद हो जाता है ॥ ४७ ॥
हरीतकाभ्रातकयोः स्रवणप्रियङ्गुकाभिश्च पिष्टाभिर्लिप्तानि लोहभाण्डानि
ताम्रीभवन्ति ॥ ४८ ॥