वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०० वात्स्यायन-कामसूत्र
ताँस्ताँश्च योगानाप्तेभ्यो बुध्येतेति वर्धनयोगाः ॥ ३१ ॥
अन्य भी वर्धनयोग हैं। उन्हें आप्त पुरुषों से जान लें। शिश्नवृद्धियोग पूर्ण हुए॥ ३१॥
अथ स्नुहीकण्टकचूर्णैः पुनर्नवावानरपुरीषलाङ्गलिकामूलमिश्रैर्यामवकिरेत्
सा नान्यं कामयेत ॥ ३२॥
चित्रयोगप्रकरण : कन्यामोहन—थूह के काँटों का चूर्ण, पुनर्नवा, लाल मुख वाले
बन्दर का विष्ठा और इन्द्रायन (कलिहारी) की जड़—इन सबको सममात्रा में पीसकर बनाया
गया चूर्ण जिसके सिर पर डाल दिया जाये वह कन्या किसी अन्य को नहीं चाहती ॥ ३२ ॥
तथा सोमलताऽवल्गुजाभृङ्गरलोहोपजिह्विकाचूर्णैर्व्याधिघातकजम्बूफलरस-
निर्यासेन घनीकृतेन च लिप्तसम्बाधां गच्छतो रागो नश्यति ॥ ३३ ॥
रागनाशनलेप—इसी प्रकार सोमलता, बाकुची के बीज, भाँगरा, लौहभस्म और
उपजिह्विका का चूर्ण तथा अमिलतास और जामुन के फल की गुठली को पीसकर मदनमन्दिर
में लेप करने से जो भी पुरुष उस स्त्री के साथ सम्भोग करता है उसका राग नष्ट हो जाता
है ॥ ३३ ॥
गोपालिकाबहुपादिकाजिह्विकाचूर्णैर्माहिषतक्रयुक्तैः स्नातां गच्छतो रागो
नश्यति ॥ ३४ ॥
गोपालिका, बहुपादिका (पोदीना) और जिह्विका (गोजिया) का चूर्ण भैंस के मट्ठे में
मिलाकर स्नान करने वाली स्त्री के साथ जो भी पुरुष सम्भोग करता है उसका राग नष्ट हो
जाता है ॥ ३४ ॥
नीपाम्रातकजम्बूकुसुमयुक्तमनुलेपनं दौर्भाग्यकरं स्रजश्च ॥ ३५ ॥
दौर्भाग्यकरण—कदम्ब, आँवड़ा और जामुन के फूलों को घिसकर चन्दन लगाना या
इनकी माला पहनना दौर्भाग्यवर्धक होता है ॥ ३५ ॥
कोकिलाक्षप्रलेपो हस्तिन्याः संहतमेकरात्रे करोति ॥ ३६ ॥
योनि-संकोचन—तालमखाने को पानी में पीसकर लेप करने से हस्तिनी नायिका की
योनि भी एक ही रात में सिकुड़ जाती है ॥ ३६ ॥
पद्मोत्पलकदम्बसर्जकसुगन्धचूर्णानि मधुना पिष्टानि लेपो मृग्या विशाली-
करणम् ॥ ३७ ॥
योनि-विस्तार—लाल कमल, नीलकमल, कदम्ब, विजयसार और नेत्रवाला—इनके
चूर्ण को शहद के साथ घोलकर लेप करने से मृगी नायिका की योनि भी गहरी और विशाल हो
जाती है ॥ ३७ ॥
स्नुहीसोमार्कक्षारैरवल्गुजाफलैर्भावितान्यामलकानि केशानां श्वेती-
करणम् ॥ ३८ ॥
बाल सफेद करना—थूहर, पुतली और आक के पत्तों को जलाकर राख बना ले और
फिर उसमें बाकुची के बीज और आँवले की भावना देकर बालों में लगाने से काले बाल भी
सफेद हो जाते हैं ॥ ३८ ॥