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सर्वकोश
वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

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१९६ वात्स्यायन-कामसूत्र
फूल कूटकर चार गुने जल में अग्नि पर चढ़ा दें। जब पानी जल जाये तो उतार लें। इसे पुष्य
नक्षत्र से प्रातःकाल चाटना प्रारम्भ कर दे। यह बलबुद्धिवर्धक, वाजीकरण और आयुर्वर्धक है।
इसे आचार्य युक्तरस कहते हैं॥ ४७॥
श्वदंष्ट्राचूर्णसमन्वितं तत्सममेव यवचूर्णं प्रातरुत्थाय द्विपलकमनुदिनं प्राश्नी-
यान्मेध्यं वृष्यं युक्तरसमित्याचार्याः प्रचक्षते॥ ४८॥
गोखरू और जौ—पहाड़ी गोखरू का चूर्ण और जौ का आटा सममात्रा में लेकर प्रातः
दो पल प्रतिदिन खाये। यह बलबुद्धिवर्धक, वाजीकरण और आयुर्वर्धक है। इसे आचार्यों ने
'युक्तरस' कहा है॥ ४८॥
आयुर्वेदाच्च वेदाच्च विद्यातन्त्रेभ्य एव च।
आप्तेभ्यश्चावबोद्धव्या योगा ये प्रीतिकारकाः॥ ४९॥
उपसंहार—पूर्वोक्त वाजीकारक योगों के अतिरिक्त अन्य भी रागरतिवर्धक योग हैं। उन्हें
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