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वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 248 में से

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पृष्ठ 197

६. वैशिक अधिकरण १७१
तद्द्वयलीकानां व्यसनानां चापरिहार्याणामनुकीर्तनम्। मर्मणां च चेटिकयोप-
क्षेपणम् ॥ ४३ ॥
बातें करने की रीति—छल-कपटपूर्ण बातें, बिना रति के उपहास, रतिकेलि में दूसरे के
बहाने नायक का उपहास, उससे बातें करते समय कटाक्ष से परिजनों को देखना और उन्हें
ताड़ित करना, उसकी बातों को बीच में काटकर दूसरी बातें करना, उसके ऐसे अवगुणों और
दोषों का वर्णन करना जिन्हें वह चाहकर भी न छोड़ सके, नौकरानी के बहाने उसकी गुप्त बातों
का उद्घाटन—यह निकालने वाले के साथ बातें करने की रीति है ॥ ४३ ॥
आगते चादर्शनम्। अयाच्ययाचनम्। अन्ते स्वयं मोक्षश्चेति परिग्रहकस्येति
दत्तकस्य ॥ ४४ ॥
अन्तिम उपाय—उसके आने पर न दिखना, न माँगने योग्य वस्तुएँ माँगना और अन्त में
धक्के देकर निकाल देना—ये अन्तिम उपाय हैं। यह विषय आचार्य दत्तक का कहा
हुआ है ॥ ४४ ॥
भवतश्चात्र श्लोकौ—
परीक्ष्य गम्यैः संयोगः संयुक्तस्यानुरञ्जनम्।
रक्तादर्थस्य चादानमन्ते मोक्षश्च वैशिकम् ॥ ४५ ॥
इस विषय में दो श्लोक प्राप्त होते हैं—
वेश्या नायकों की परीक्षा करके ही उनके साथ समागम करे। जिसके साथ समागम हो
जाये, उसे अनुरक्त करे। अनुरक्त का धन खींचे और अन्त में उसे धक्के देकर निकाल दे—संक्षेप
में वेश्याओं का आचार्य दत्तकप्रोक्त यही चरित्र है ॥ ४५ ॥
एवमेतेन कल्पेन स्थिता वेश्या परिग्रहे।
नातिसन्धीयते गम्यैः करोत्यर्थांश्च पुष्कलान् ॥ ४६ ॥
वेश्याओं के जो कार्य कहे गये हैं, उनका प्रयोजन क्या है, यह आगे बताते हैं—यदि
वेश्या ऊपर कही गयी रीति से नायकों से संसर्ग करती है और अपने प्रेमियों को धोखा नहीं देती
तो वह विपुल धन एकत्र कर लेती है। इस तरह निष्कासनक्रम पूर्ण हुआ ॥ ४६ ॥ ( ३ )
अर्थागमोपाय नामक तृतीय अध्याय सम्पन्न ॥
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चतुर्थ अध्याय
विशीर्णप्रतिसन्धान प्रकरण
वर्तमानं निष्पीडितार्थमुत्सृजन्ती पूर्वसंसृष्टेन सह सन्दध्यात् ॥ १ ॥
विशीर्णप्रतिसन्धान : जिसका सारा धन निचोड़ (चूस) लिया हो, ऐसे नायक को
छोड़ती हुई वेश्या पूर्व नायक से सन्धि कर ले ॥ १ ॥
काम० १३