वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६८ वात्स्यायन-कामसूत्र
नायकार्थं च शिल्पियु कार्यम् ॥ १४ ॥
शिल्पकारों से ऐसी वस्तुएँ बनवा ले जिसमें नायक को धन खर्च करना पड़े ॥ १४ ॥
वैद्यमहामात्रयोरुपकारक्रिया कार्यहेतोः ॥ १५ ॥
वैद्य और राजपुरुषों पर उपकार—अपने कार्य के लिये वैद्य और राजपुरुषों पर उपकार
कर दे ॥ १५ ॥
मित्राणां चोपकारिणां व्यसनेष्वभ्युपपत्तिः ॥ १६ ॥
मित्रों की सहायता—नायक के मित्रों एवं उपकारियों की सङ्कट में सहायता
अवश्य करे ॥ १६ ॥
गृहकर्म सख्याः पुत्रस्योत्सङ्गनम् दोहदो व्याधिर्मित्रस्य दुःखापनयन-
मिति ॥ १७ ॥
नायक से धन लेने के लिये घर बनवाने, सखी के पुत्र के उत्सङ्गन (चूड़ाकर्म, अन्नप्राशन
आदि), दोहद, मित्र की व्याधि और दुःख दूर करने का बहाना करे ॥ १ ॥
अलङ्कारैकदेशविक्रयो नायकस्यार्थे ॥ १८ ॥
नायक के किसी कार्य के लिये अपने कुछ आभूषण बेच दे ॥ १८ ॥
तया शीलितस्य चालङ्कारस्य भाण्डोपस्करस्य वा वणिजो विक्रयार्थं
दर्शनम् ॥ १९ ॥
प्रियवस्तु की बिक्री का बहाना—अपने प्रिय आभूषणों, बर्तनों और घर के सामान को
नायक के सामने ही व्यापारी को बिक्री हेतु दिखाये ॥ १९ ॥
प्रतिगणिकानां च सदृशस्य भाण्डस्य व्यतिकरे प्रतिविशिष्टस्य
ग्रहणम् ॥ २० ॥
विशिष्ट बर्तनों की माँग—प्रतिवेश्याओं से समान बर्तन होने के कारण उसके बर्तन
प्रायः बदल जाते हैं, इस बहाने उत्तम बर्तनों की माँग करे ॥ २० ॥
पूर्वोपकाराणामविस्मरणमनुकीर्तनं च ॥ २१ ॥
नायक के प्रति कृतज्ञताज्ञापन—नायक द्वारा किये गये पहले उपकारों को न भूले और
उनका प्रेमपूर्वक वर्णन करे ॥ २१ ॥
प्रणिधिभिः प्रतिगणिकानां लाभातिशयं श्रावयेत् ॥ २२ ॥
अपने विश्वस्त नौकरों द्वारा दूसरी प्रतिवेश्याओं को होने वाले अधिक लाभ की बात
नायक को सुनवाये ॥ २२ ॥
तासु नायकसमक्षमात्मनोऽभ्यधिकं लाभं भूतमभूतं वा व्रीडिता नाम
वर्णयेत् ॥ २३ ॥
यदि अपने यहाँ कोई वेश्या आयी हुई हो तो नायक के सामने उससे लाभ को बढ़ा-
चढ़ाकर कहे और यदि कोई लाभ न हुआ हो तो नायक की ओर देखकर और लजाकर लाभ
होना बताये ॥ २३ ॥