वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६. वैशिक अधिकरण १६७
अलङ्कारभक्ष्यभोज्यपेयमाल्यवस्त्रगन्धद्रव्यादीनां व्यवहारिषु कालिकमुद्धा-
रार्थमर्थप्रतिनयनेन ॥ ४ ॥
धन-प्राप्ति के उपाय — आभूषण, भक्ष्य (लड्डू, जलेबी आदि), भोज्य (अन्न), पेय
(शर्बत, मदिरा आदि), माला, वस्त्र (सूती, रेशमी, ऊनी कपड़े) और गन्ध आदि वस्तुएँ बेचने
वालों को वायदे पर जो मूल्य चुकाना है उसके लिये अथवा उसके बदले में जो वस्तु धरोहर रूप
में रखी हो, उसे छुड़ाने के लिये रुपया ले ले ॥ ४ ॥
तत्समक्षं तद्वित्तप्रशंसा ॥ ५ ॥
वैशिक के धन की प्रशंसा—वैशिक के सामने उसके धन की खुलकर प्रशंसा
करे ॥ ५ ॥
व्रतवृक्षारामदेवकुलतडागोद्यानोत्सवप्रीतिदायव्यपदेशः ॥ ६ ॥
व्रत, वृक्ष, उद्यान, देवमन्दिर, कुआँ, बावड़ी, उत्सव और प्रेमोपहार का बहाना करे ॥ ६ ॥
तदभिगमननिमित्तो रक्षिभिश्चौरैर्वालङ्कारपरिमोषः ॥ ७ ॥
लूट का बहाना—आप से मिलने के लिये आ रही थी कि रास्ते में रक्षकों (पहरेदारों)
या चोरों ने आभूषण उतरवा लिये ॥ ७ ॥
दाहात् कुड्यच्छेदात् प्रमादाद् भवने चार्थनाशः ॥ ८ ॥
अग्निकाण्ड या विनाश का बहाना—घर में आग लग जाने, सेंध लग जाने या
असावधानी से धन के नष्ट हो जाने का बहाना करे ॥ ८ ॥
तथा याचितालङ्काराणां नायकालङ्काराणां च तदभिगमनार्थस्य व्ययस्य
प्रणिधिभिर्निवेदनम् ॥ ९ ॥
स्वागत-सत्कार का खर्च—इसी प्रकार माँगे हुए या नायक द्वारा दिये हुए आभूषणों के
विषय में भी कह दे और फिर वेश्या उससे मिलने के समय हुए खर्च के लिये विश्वस्त नौकरों
से कहलवाये ॥ ९ ॥
तदर्थमृणग्रहणम् । जनन्या सह तदुद्भवस्य व्ययस्य विवादः ॥ १० ॥
ऋण—नायक के स्वागत-सत्कार हेतु ऋण ले लेना चाहिये और फिर अपनी माँ के साथ
उस व्यय पर विवाद करना चाहिये ॥ १० ॥
सुहृत्कार्येष्वनभिगमनमनभिहारहेतोः ॥ ११ ॥
प्रेमोपहार की विवशता—यदि नायक के किसी मित्र के घर उत्सव हो और वह चलने
के लिये कहे तो यही कह दे कि मेरे पास देने के लिये कुछ कहीं है, इसलिये नहीं
जाऊँगी ॥ ११ ॥
तैश्च पूर्वमाहृता गुरवोऽभिहाराः पूर्वमुपनीताः पूर्वं श्राविताः स्युः ॥ १२ ॥
उनके लाये हुए बड़े बड़े प्रेमोपहार आपने पहले ही ले लिये हैं, यह बात जाने से पूर्व ही
सुना दे ॥ १२ ॥
उचितानां क्रियाणां विच्छित्तिः ॥ १३ ॥
आवश्यक खर्चों में कटौती—दैनिक जीवन के आवश्यक खर्चों में भी कटौती
कर दे ॥ १३ ॥